दिल्ली पुलिस की महिला कमांडो को आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिये दिया जा रहा खास प्रशिक्षण

DR. SUMIT SENDRAM

शिवपुरी। दिल्ली पुलिस की 19 महिला कमांडो को मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा स्थित भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल(आइटीबीपी) के प्रशिक्षण संस्थान में मार्क्समैन प्रशिक्षण दिया जा रहा हैं।
चार सप्ताह के प्रशिक्षण में इन्हें 100 से लेकर 400 मीटर दूरी तक सटीक निशाना लगाकर हाई वैल्यु टारगेट (सबसे खतरनाक दुश्मन) का सफाया करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
पहली बार आपातकालीन परिस्थितियों में शहरी युद्ध से निपटने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
ऐसी परस्थितियों में निपटना जटिल होता है। इसमें दुश्मन आमजन के बीच होता है। ऐसे में यह महिला कमांडो भीड़ में भी टागरेट को लंबी दूरी से महज चार सेकेंड में खत्म करने में दक्षता हासिल करेंगी।
पहले सप्ताह में 100 मीटर, दूसरे में 200 मीटर, तीसरे में 300 मीटर और चौथे सप्ताह में 400 मीटर दूर मौजूद टारगेट को खत्म करने में दक्ष बनाया जायेगा।
आइटीबीपी के उप महानिरीक्षक सुरिंदर खत्री ने बताया कि 400 मीटर दूर मौजूद टारगेट को चंद सेकेंड में खत्म कर देना आसान नहीं होता है। इसलिये यह प्रशिक्षण खास है। इसे मार्क्समैन प्रशिक्षण कहा जाता है। यह पहला अवसर है जब आइटीबीपी द्वारा पुलिस बल के लिये इस तरह के प्रशिक्षण का अयोजन किया जा रहा है। मार्क्समैन कोर्स के डायरेक्टर उप सेनानी मनीष कुमार गौतम हैं।
मार्क्समैन वह होता है जो हाई वैल्यु टाइगेट के ऊपर निशाना साधकर उसे खत्म कर देता है।
प्रशिक्षण के शुभांरभ अवसर पर मौजूद रहीं दिल्ली पुलिस की अति. पुलिस आयुक्त पूर्णिमा पांथरी का भी कहना रहा कि राष्टीय राजधानी क्षेत्र को देखते हुए महिला कमांडो के लिये यह कोर्स बहुत उपयोगी साबित होगा।
कमांडो सामान्य तौर पर आकार में छोटे हथियारों का इस्तेमाल करते हैं। 300 मीटर तक की दूरी पर सामान्य हथियारों से टारगेट को मारा जा सकता है। जब बात 400 मीटर तक की दूरी पर टारगेट हिट करने की आती है तो इसमें टेलिस्कोपिक साइट की जरूरत होती है। इन कमांडो को टेलिस्कोपिक डे लाइट साइट के जरिये लंबी दूरी के टारगेट को खत्म करने में दक्ष बनाया जायेगा। इसमें इंसास राइफल का इस्तेमाल किया जायेगा।
मार्क्समैन की भूमिका स्नाइपर एवं इनके द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले हथियार से भी अलग होती है।
स्नाइपर सामान्यत: 600 मीटर या उससे अधिक दूरी से लक्ष्य पर निशाना साधते हैं। जबकि मार्क्समैन 300 से 600 मीटर तक के टारगेट को सटीक तरीके से भेदने के लिए प्रशिक्षित होते हैं। कई देशों की मिलिट्री में मार्क्समैन इंफ्रेंट्री दल का हिस्सा होते हैं।

 

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