इंदौर। इरादे मजबूत और हौसले बुलंद हो तो कोई भी काम इंसान के लिए असंभव नहीं होता है।
सुदूर जंगल में बसे छोटे से गांव की महिला ने इसी पक्तियों को चरितार्थ कर दिखाया।
जिला मुख्यालय से 50 किमी दूर पहाड़ियों से घिरे और घने जंगल में बसे कालाकुंड सहित 11 गांव, जहां एक समय पहुंचना भी काफी मुश्किलो से भरा था। लोगों को भारी परेशानी का सामना करते देख महिला ने पहाड़ काटकर राह बनाने की जुगत बताई। किसी ने उनकी बात पर यकीन नहीं किया और इस कार्य को असंभव बताया, लेकिन अदम्य साहसी इस महिला ने अकेले इस दुरूह कार्य को पूरा करने का संकल्प लेकर काम शुरू कर दिया।
देखते ही देखते लोगों का साथ भी मिलने लगा और नई राह तैयार हो गई।
आज 11 गांवों के सैकडों लोगों के लिए महू तक पहुंचने की राह 15 किमी आसान हो गई।
वे रोजगार और अपनी उपज लेकर मुख्य मार्ग तक जा पा रहे थे।
यह साहसिक कार्य किया चम्पा बाई पति शोभाराम मावी नामक महिला ने।
कालाकुंड पंचायत की सन 2000 से 2005 तक सरपंच रही चम्पा आज भी कच्चे मकान में रहती हैं और कड़ा परिश्रम कर परिवार का जीवन-यापन करती हैं।
वर्तमान सरपंच शिव दुबे ने बताया कि उस दौर में महू जाने के लिए चोरल, तलाई नाका होते हुए करीब 30 किमी सफर करना पड़ता था। चम्पा बाई ने गांव के ही लोगों के साथ मिलकर 1.5 किमी लंबे पहाड़ पर रास्ता बनाना का प्रस्ताव रखा। कई लोगों ने मना किया, पर चम्पा बाई का हौंसला कम नहीं हुआ। कई महीनों की मेहनत के बाद पहाड़ चीर कर कालाकुंड से भगोरा तक कच्ची सड़क तैयार की गई। इसके बाद महू की दूरी सिर्फ 15 किमी रह गई।
गत वर्ष ही सरकार ने इसी कच्ची सड़क को पक्का करने के लिए टेंडर जारी कर दिया है।
चम्पा बाई ने बताया कि जब सरपंच थी तब पंचायत के नावदिया गांव के लोग गांव खाली करने लगे थे। क्योंकि वहां पहुंच मार्ग नहीं था। हमने ग्रामीणों के साथ मिलकर इस पहाड़ पर सड़क बनाई। इसके बाद गांव के लोग वापस रहने आ गए।

