न्यायलय की समझाइश के बाद 8 वर्षो के बाद साथ रहने को दंपत्ति हुए तैयार

इंदौर। पति-पत्नी के बीच माता-पिता का इंटरफेयर हो इस शर्त पर तलाक की दहलीज तक आए पति-पत्नी साथ रहने को तैयार हो गए।
दरअसल पत्नी चाहती थी कि सास-ससुर पति को रोकें-टोकें। ताकि वे मनमानी न कर सके।
आपसी विवाद में दोनों 8 वर्षो से पति पत्नी अलग रह रहे थे।
न्यायलय की समझाइश के बाद पति-पत्नी एक बार फिर साथ रहने को तैयार हुए हैं।
दीपाली (परिवर्तित नाम) उम्र 38 साल निवासी इंदौर की शादी बृजेश (परिवर्तित नाम) उम्र 39 साल निवासी भोपाल से 4 जुलाई 2011 को हुई।
शादी के समय पति की मोबाइल की दुकान थी, लेकिन बाद में बंद हो गई। पति-पत्नी किराए का घर लेकर रहते थे। कामकाज नहीं करने पर पति-पत्नी में झगड़े होने लगे।
ससुराल में पत्नी अपने मायके से रुपए-पैसे लेकर अपना खर्च चलाने लगी। पति ने इवेंट का काम शुरू किया। इसलिए वे रात-रात भर घर नहीं आते। दो-तीन दिन तक घर से बाहर रहते। परेशान होकर पत्नी 8 साल पहले पति को छोड़ बच्चे सहित मायके इंदौर माता-पिता के पास आ गई।
दीपिका का 8 साल का बच्चा है। इसके बाद उसने पति के खिलाफ 2019 में तलाक और भरण-पोषण का केस लगा दिया। इस पर फैमिली कोर्ट से अंतरिम भरण-पोषण के तौर पर 5 हजार रुपए महीना देने के निर्देश पति को दिए।
जब पति कोर्ट में उपस्थित हुआ तो पत्नी के बारे में कहा कि वो सुहाग चिन्ह नहीं पहनती हैं। दोनों पक्ष को समझाया गया। इसके बाद पति और पत्नी दोनों को गलतियों का अहसास हुआ। आखिर में पत्नी भी साथ रहने को तैयार हो गई।
कोर्ट से ही पत्नी को भेजा गया कि तुम सुहाग चिन्ह (मंगलसूत्र) धारण करके उपस्थित हों। कुछ देर बाद पत्नी मंगलसूत्र पहनकर आ गई।
पति फिलहाल भोपाल में माता-पिता के साथ रहता है। उसने किराए का घर लेकर पत्नी के साथ रहने की बात कही। हालांकि, पत्नी दीपिका सास-ससुर के साथ रहना चाहती है। ताकि अगर पति मनमानी करे तो उन्हें टोकने वाला हो।
अधिवक्ता राहुल विजयवर्गीय ने बताया कि पति-पत्नी के बीच जो तलाक का केस चल रहा था, उसे कोर्ट ने खत्म कर दिया है। लेकिन मेंटेनेंस का केस जारी है। जिसमें अगली तारीख अप्रैल की है। घर खर्च सहित अन्य खर्च के लिए लिए पति पत्नी को रुपए देगा। ये पति के द्वारा आश्वस्त किया गया है।

 

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