जबलपुर। जिले में इस बार बम्हनी (बरेला) की काली माता 51 फीट की हैं, जिन्हें प्रदेश की सबसे ऊंची काली प्रतिमा माना जा रहा है।
समिति द्वारा माता की स्थापना के लिए बांसों का बड़ा ढांचा तैयार करने के बाद झांकी सजाने में जुटेगी।
मूर्तिकाल ने सृजन में जितना श्रम किया, उतना ही श्रम कार्यशाला से पंडाल तक लाने में लगा।
नौ दिन पूजन के उपरांत प्रतिमा विसर्जन के समय भी यही मशक्कत देखने को मिलेगी।
समिति के कार्यकर्ताओ ने बताया कि हमारी समिति की कालीमाता का दर्शन करने वाले भक्तों को स्वयं दिव्यता की अनुभूति होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां संपूर्ण विधि-विधान का पालन कर पूजन किया जाता है।
बता दे कि इस बार संस्कारधानी में नवरात्र पर्व पर जबरदस्त उत्साह नजर जा रहा है। शहर के अलग-अलग इलाकों में 1000 से अधिक पंडालों में नवरात्री में माता रानी की प्रतिमायें सजाई जाएंगी। गुरुवार को कई पण्डालों में मां दुर्गा की प्रतिमा शुभ मुहूर्त में विराजित की गई। सभी माता मंदिरों की आकर्षक विद्युत साज-सज्जा की गई है।
बगलामुखी सिद्धपीठ शंकराचार्य मठ सिविक सेंटर सहित त्रिपुर सुंदरी मन्दिर तेवर, छोटी खेरमाई, बड़ी खेरमाई व बूढ़ी खेरमाई मन्दिरों में ज्योतिकलश स्थापित किए गए। यहां जवारे भी बोए गए, जिनकी नौ दिनों तक भक्तिभाव से सेवा व अर्चना की जाएगी।इन सभी देवी मंदिरों में गुरुवार को देशविदेश के भक्तों की ओर से मनोकामना अखंड ज्योति कलश भी स्थापित किए गए। इसके साथ ही देवी उपासकों द्वारा अपने घरों में भी घट स्थापना व जवारे बोए गए।
बता दे कि शारदीय नवरात्री इस वर्ष पूरे नौ दिन की हैं। महा पुण्यदायिनी अष्टमी तिथि 10 अक्टूबर को है। इस दिन माता के महागौरी रूप की पूजा की जाती है।
पं. शिव कुमार मिश्रा के मुताबिक 11 अक्टूबर को नवमीं तिथि रहेगी। इसमें हवन आदि सम्पन्न होंगे। उसके बाद दशमीं की तिथि प्रारम्भ हो जाएगी।

