रायसेन। जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड के टॉयलेट में पत्नी की हत्या के आरोपी का शव फांसी के फंदे पर लटका मिला। घटना मंगलवार सुबह की है। शुरुआती जांच में पुलिस इसे आत्महत्या मान रही है।
पुलिस के मुताबिक मृतक की पहचान 60 वर्षीय जमुना प्रसाद गौर के रूप में हुई है। जमुना पत्नी को आग लगाकर मौके से फरार हो गया था।
जाँच में पता चला है कि जमुना प्रसाद ने 25 फरवरी को विदिशा में ट्रेन के सामने आत्महत्या की कोशिश की थी। आरपीएफ ने घायल हालत में उसे विदिशा अस्पताल में भर्ती कराया था। वहां से वह सोमवार सुबह भाग निकला और दोपहर में रायसेन जिला अस्पताल आ गया।
सिविल सर्जन डॉ. यशपाल बाल्यान ने बताया कि मंगलवार सुबह करीब 9 बजे आरोपी जमुना प्रसाद ने स्टाफ से बाथरूम जाने की बात कही। स्टाफ उसे बाथरूम ले गया। उसने अंदर से गेट लगा लिया।
कुछ देर बाद अंदर से छटपटाने की आवाजें आईं तो अस्पताल स्टाफ मौके पर पहुंचा। दरवाजा तोड़कर जमुना प्रसाद का बाहर लेकर आए, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसने चड्ढे का नाड़ा निकालकर खिड़की पर फंदा बनाया और उससे लटक गया।
डॉक्टर के मुताबिक जमुना प्रसाद सोमवार दोपहर अकेले ही जिला अस्पताल आया था, उसका एक पैर टूटा हुआ था। हालत गंभीर थी, इसलिए उसे भर्ती कर लिया गया था।
पुलिस के मुताबिक 20 फरवरी को आरोपी जमुना प्रसाद गौर ने पत्नी महफूल पर पेट्रोल डालकर आग लगाने की कोशिश की थी। पत्नी ने बचाव के लिए उससे झूमाझटकी की और माचिस छुड़ा ली। इस पर गुस्साए पति ने लाइटर जलाकर पत्नी को आग के हवाले कर दिया। जलती पत्नी को भीतर छोड़कर बाहर से गेट लगाकर फरार हो गया था। शोर सुनकर पड़ोसियों ने उसे बाहर निकला और रायसेन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। करीब 75 प्रतिशत जल चुकी महिला की हालत देखकर डॉक्टरों ने तत्काल उसे भोपाल रेफर कर दिया था। 25 फरवरी को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
जांच में सामने आया था कि जमुना को सुबह दूध पीने की आदत थी। उसे शक था कि पत्नी दूध में पानी मिला देती है। इसे लेकर कई बार पहले भी विवाद हुआ था। घटना वाले दिन भी इसी बात को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद उसने पत्नी को जला दिया था।
इस घटनाक्रम से नाराज गौर समाज ने आरोपी जमुना प्रसाद के परिवार को समाज से बाहर कर दिया था।
इसी कारण पुलिस की सूचना पर ना ही समाज जन और ना ही परिजन पहुंचे।


