जबलपुर। आयुध क्षेत्र में बेहतरीन बमों के उत्पादन में आर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया (ओएफके) 125 एमएम बम का नया वर्जन बनाने की ओर कदम बढ़ा चुकी है।
इसे प्रैक्टिस बम नाम दिया गया है।
यह बम देश की सीमाओं की चौकसी में सतत सजग सेना के युद्धाभ्यास के लिए होगा।
पायलट लाॅट को परीक्षण के लिए ओडिशा के समुद्र तटीय शहर बालासोर भेजा जा रहा है। परीक्षण के निष्कर्षों का आकलन करते हुए विशेषज्ञ टीम के दिशा-निर्देशों के अनुरूप इसके बाद प्रैक्टिस बम का उत्पादन प्रारम्भ हो जाएगा।
प्रैक्टिस बम की पहली खेप में 400 बमों को तैयार किया गया है।
परीक्षण के लिए बनाए गए इन बमों को पायलट लाट नाम दिया गया है। इसे ओडिशा के टेस्टिंग रेंज बालासोर भेजा जा रहा है।
ओएफके पायलट लाट के परीक्षण के बाद उसके निष्कर्षों का अध्ययन करते हुए प्रैक्टिस बम का उत्पादन आरंभ हो जाएगा।
प्रैक्टिस बम सेना की मांग को ध्यान में रखकर 125 एमएम का नया वर्जन है।
ओएफके में बनाए जाने वाले बमों की खेप बालासोर टेस्टिंग रेंज में परीक्षण के लिए भेजे जाते हैं। जहां ओएफके के साथ डीआरडीओ की टीम भी बमों के परीक्षण का बारीकी से अध्ययन कर उसकी रिपोर्ट तैयार करते हैं। परीक्षण के निष्कर्षों के आधार पर ही यह तय होता है कि पायलट लाट में शामिल बम परीक्षण में सफल रहे अथवा फेल हो गए। इस बार भी पहले पायलट ही तैयार किया गया है।
परीक्षण में खरे उतरने के बाद डीआरडीओ की हरी झंडी के बाद ओएफके में प्रैक्टिस बम के पहले चरण पर कार्य आरंभ हो जाएगा।
पहले चरण में करीब 8000 प्रैक्टिस बम का उत्पादन होगा।


