नक्सली एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए आदिवासी कांग्रेस ने राष्ट्रपति के नाम सौपा ज्ञापन

मंडला। 9 मार्च को हुए नक्सली एनकाउंटर के खिलाफ आदिवासी कांग्रेस ने शुक्रवार को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन एसडीएम सोनल सिडाम को सौंपा है।
आदिवासी कांग्रेस का कहना है कि हीरन एक गरीब मजदूर था। वह मानसिक रूप से कमजोर था एवं वनोपज तथा मजदूरी से परिवार का पालन-पोषण करता था। उसकी मौत के बाद पत्नी विसरो बाई और 5 बच्चे बेसहारा हो गए हैं।
बता दे कि जिले के कान्हा क्षेत्र में हॉक फोर्स और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में 1 व्यक्ति की मौत हो गई थी। मृतक की पहचान ग्राम खटिया के लसरे टोला निवासी हीरन परते के रूप में हुई है। कांग्रेस ने पीड़ित परिवार को 2 करोड़ मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग की है। साथ ही नक्सली सहयोग के आरोप में गिरफ्तार अशोक वाल्के और संतोष धुर्वे की रिहाई की मांग भी की है।
आदिवासी कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दोषी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। मामले को देखते हुए केबिनेट मंत्री संपतिया उइके ने 16 मार्च को पीड़ित परिवार से मिलकर निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया।
वही, विधानसभा में हंगामे के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि अगर नक्सली कनेक्शन नहीं मिला तो परिवार को 1 करोड़ दिए जाएंगे। दोषियों पर कार्रवाई भी की जाएगी।
19 मार्च को मंडला कलेक्टर द्वारा विसरो बाई को 10 लाख का चेक सौंपा गया।
गौरतलब है कि 10 मार्च को पुलिस ने प्रेसवार्ता में मुठभेड़ की जानकारी दी थी, जिसमें एक नक्सली के मारे जाने और दो सहयोगियों की गिरफ्तारी की बात कही गई। पहचान उजागर होने के बाद बिछिया विधायक नारायण पट्टा और गोंगपा नेता कमलेश तेकाम ने परिजनों से मुलाकात कर न्यायिक जांच की मांग की। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी एनकाउंटर पर सवाल उठाए।

 

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