एटीएम कार्ड क्लोन कर राशि आहरण में बैंक को माना गया दोषी, क्षतिपूर्ति के साथ 50 हजार का लगाया अर्थदंड

भोपाल। एटीएम कार्ड क्लोन कर राशि आहरण में बैंक की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जा रही है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव और न्यायनिर्णयन प्राधिकारी निकुंज श्रीवास्तव ने पंजीकृत 46 याचिकाओं में से 36 याचिकाएं निराकृत की हैं।
एक याचिका में उन्हाेंने एटीएम कार्ड क्लोन कर खाते से अनाधिकृत रूप से राशि आहरित होने पर बैंक को दोषी पाया और 80 हजार रुपये वास्तविक हानि तथा 50 हजार रुपये का जुर्माना ब्याज के साथ याचिकाकर्ता को देने का आदेश किया है।
गैर कानूनी रूप से बैंक खाते से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन्स से अनाधिकृत ट्रांजेक्शन पर दोषी बैंक को याचिकाकर्ता की वास्तविक हानि की शत-प्रतिशत राशि 50 हजार 246 रुपये तथा न्यायालय शुल्क, मानसिक प्रताड़ना आदि के लिए 50 हज़ार रुपये का ब्याज सहित याचिकाकर्ता को किए जाने का आदेश दिया गया है।
सूचना प्रौद्योगिकी के निर्धारित मापदंडों के उल्लंघन, दुरुपयोग को रोकने और नागरिकों के हितों के संरक्षण के लिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 में कई प्रविधान हैं। अधिनियम की धारा-43 एवं 43ए के उल्लंघन पर बैंक, दूरसंचार नेटवर्क प्रदाता को दोषी पाने पर प्रभावित व्यक्ति को हुई क्षतिपूर्ति कराने के प्रविधान हैं।
उप सचिव विज्ञान और प्रौद्योगिकी आदित्य सिंह ने बताया है कि अधिनियम के तहत अब तक न्याय निर्णयन प्राधिकारी ने पंजीकृत 46 याचिकाओं में से 36 याचिकाएं निराकृत की हैं। पंजीकृत प्रकरणों और याचिकाओं में रिजर्व बैंक आफ इंडिया एवं दूरसंचार विभाग की गाइडलाइन के उल्लंघन से याचिकाकर्ताओं को हुई क्षति के लिए दोषी पाए जाने पर संबंधित सेवा प्रदाता से क्षतिपूर्ति अधिनियम की धारा 46 के तहत कराई जाती है। अधिनियम के तहत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव, न्यायनिर्णयन प्राधिकारी हैं। उन्हें अधिनियम के तहत क्षतिपूर्ति कराने की शक्तियां प्राप्त हैं।
न्याय निर्णयन प्राधिकारी द्वारा आइटी एक्ट के प्रविधान अनुसार उल्लंघन पर दोषी बैंक और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं पर कार्यवाही कर नागरिकों के हितों का संरक्षण किया जा रहा है। प्रभावित नागरिक की याचिका पर दूरसंचार सेवा प्रदाता को दिशा-निर्देशों का पालन न कर मोबाइल सिम जारी करने के लिए दोषी पाए जाने पर याचिकाकर्ता को वास्तविक हानि की 75 प्रतिशत राशि 31 लाख 52 हज़ार 250 रुपये तथा संबंधित बैंक को दोषी पाए जाने पर क्षति की 25 प्रतिशत राशि 10 लाख 50 हजार 750 रुपये की क्षतिपूर्ति का आदेश किया है।
साथ ही न्यायालय शुल्क, मानसिक प्रताड़ना आदि के लिए दूरंसचार नेटवर्क प्रदाता एवं संबंधित बैंक को एक-एक लाख रुपये का जुर्माना ब्याज सहित याचिकाकर्ता को देने के लिए कहा है।
एक अन्य याचिका में दूरसंचार नेटवर्क प्रदाता तथा संबंधित बैंक दोनों को समान रूप से दोषी पाए जाने पर दोनों दोषियों द्वारा 17 लाख 50 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति तथा 25-25 हज़ार का जुर्माना ब्याज सहित याचिकाकर्ता को किए जाने का न्याय निर्णयन प्राधिकारी ने आदेश किया।

 

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