धड़ल्ले से संचालित हैं अवैध क्लीनिक, जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य अमले की लापरवाही से मरीजों की जान जोखिम में

सीधी। जिले भर में झोलाछाप डाक्टरों एवं अवैध मेडिकल स्टोर संचालन को लेकर कड़ी कार्यवाही न होने के कारण कोई खौफ नहीं दिख रहा है। जिसमें
स्थिति ये है कि शहरी एवं कस्बाई क्षेत्रों में ऐसे लोग मरीजों के उपचार के लिए क्लीनिक का संचालन कर रहे हैं जिनके पास कोई भी वैध डिग्री नहीं है।
वहीं, मेडिकल स्टोर संचालन को लेकर भी यही स्थिति बनी हुई है।
ऐसे लोग मेडिकल स्टोर का संचालन कर रहे हैं जिनको डॉक्टर की लिखी पर्ची की दवाएं भी समझ में नहीं आतीं। दवाई लेने गए व्यक्ति से मर्ज का ब्यौरा पूछकर ऐसे लोग मनमानी दवाएं दे रहे हैं। ऐसे में मरीज की हालत सुधरने की बजाय कई बार और भी ज्यादा बिगड़ जाती है।
कुछ इसी तरह का मामला सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सेमरिया क्षेत्र का सामने आया है। यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के समीप ही आधा दर्जन से ज्यादा अवैध क्लीनिक एवं मेडिकल स्टोरों का संचालन किया जा रहा है। साथ ही सेमरिया बाजार क्षेत्र को मिलाकर आधा सैकड़ा के आसपास अवैध क्लीनिक एवं मेडिकल स्टोर संचालित हैं।
ऐसा ही हाल सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रामपुर नैकिन क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम हत्था, बघवार, रैदुअरिया, मढ़ा, झांझ, चुरहट सहित दो सैकड़ा से ऊपर अवैध क्लीनिक का है जो बेखौफ़ संचालन हो रहा है।
विकासखंड स्तर पर बैठे बीएमओ एवं जिला से गठित कमेटी के सदस्य मूकबधिर बने हुए तमाशा देख रहे हैं।
कथित डॉक्टर अवैध क्लीनिक के साथ ही दवाओं का भारी स्टाक रखते हैं। उनके द्वारा मरीजों को अपनी क्लीनिक से ही दवाई की बिक्री भी मनमानी तौर पर की जा रही है।
जानकारों का कहना है कि सेमरिया अंचल में अवैध क्लीनिक एवं मेडिकल स्टोर संचालन को लेकर कभी-कभार छापामार कार्यवाही होती है लेकिन बाद में जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा संबंधितों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही सुनिश्चित कराने की बजाय लीपापोती कर दी जाती है। इसी वजह से छापामार कार्यवाही के दौरान जो अवैध क्लीनिक एवं मेडिकल स्टोर पकड़े गए थे वह कुछ दिनों के अंदर ही फिर से संचालित होने लगे।
कोरोना काल के बाद से अवैध क्लीनिको एवं मेडिकल स्टोर संचालकों को पूरी तरह से अभयदान दे दिया गया। जिस वजह से इनके विरूद्ध कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। जिसका पूरा-पूृरा लाभ झोलाछाप डॉक्टर एवं अवैध मेडिकल स्टोर संचालक उठा रहे हैं।
चर्चा के दौरान अवैध क्लीनिक का संचालन करने वाले कुछ कथित डॉक्टरों का कहना था कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को प्राथमिक उपचार सुविधा उपलब्ध कराने में रीढ़ की हड्डी झोलाछाप डॉक्टर ही हैं। इस बारे में संबंधित अधिकारियों को भी जानकारी है। जिसके चलते उनके द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है।
उधर जिले के स्वास्थ्य विभाग से संबंधित कुछ अधिकारियों का भी इसी तरह का जवाब अनौपचारिक रूप से रहा। उनका भी कहना है कि शासकीय डॉक्टरों की सीधी जिले में काफी कमी है। ग्रामीण क्षेत्रों में जो स्वास्थ्य केन्द्र संचालित हो रहे हैं उनमें भी आवश्यक डॉक्टर नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति ये है कि यदि उन्हे प्राथमिक बीमारी होती है तो नजदीकी झोलाछाप डॉक्टरों से उपचार कराकर राहत पा जाते हैं। ये अवश्य है कि अवैध क्लीनिक एवं अवैध मेडिकल स्टोर संचालन से लोगों को काफी नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। जिस पर यदि प्रशासनिक कार्यवाही सख्ती के साथ हो जाए तो स्थिति में कुछ सुधार आ सकता है।

 

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