शहपुरा(डिंडोरी)। जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के कारण किसान अपनी पारंपरिक खेती के तरीकों से परेशान हो रहे हैं और अपने खेतों में फसल अवशेषों के प्रबंधन न होने से परेशान है।
इस चुनौती का समाधान खोजने के लिए बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया और स्थानीय कृषि विभाग ने मिलकर किसानों को नई और प्रभावी तकनीक के माध्यम से कृषि सुधार का अवसर प्रदान किया है ।
कलेक्टर हर्ष सिंह, डीडीए अभिलाषा चौरसिया व कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों के खेतों का अवलोकन किया।
बोरलॉग इंस्टिट्यूट के प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर डॉ. पंकज कुमार एवं तकनीकी अधिकारी मनीष भारद्वाज एवं चंदन कुमार के दिशा निर्देशों एवं कृषि विभाग के द्वारा प्रखंड शहपुरा के बांकी गांव के किसान आशीष साहू के खेत में बिना जुताई के हैप्पी सीडर द्वारा गेहूं की बुवाई एवं ड्रोन द्वार यूरिया का छिड़काव एवं फसल अवशेष प्रबंधन एवं जलवायु अनुकूल खेती करने और फसल अवशेषों को न जलाने की सलाह दी गई।

