सात मौतो का आरोपी फरार फर्जी डॉक्टर को पुलिस ने प्रयागराज से किया गिरफ्तार, डिग्री में पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी के फर्जी हस्ताक्षर

दमोह। शहर के मिशन अस्पताल में 7 मरीजो की मौत के आरोपी डॉ. नरेंद्र जॉन केम ने पुलिस पूछताछ में स्वीकार कर लिया है कि उसके सभी प्रमाणपत्र फर्जी हैं। डॉक्टर ने बताया कि उसने सभी प्रमाणपत्र एडिट किए हैं। उसकी कार्डियोलॉजिस्ट की डिग्री पर पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी के फर्जी हस्ताक्षर हैं।
पुलिस अधीक्षक श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने बताया कि आरोपी डॉक्टर पुलिस को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है। अभी तक की पूछताछ में उसने बताया कि वह जर्मनी गया था। उसके पासपोर्ट से इस बात की पुष्टि कर रहे हैं। वह उत्तराखंड नहीं बल्कि कानपुर का रहने वाला है और उसका असली नाम विक्रमादित्य नरेंद्र यादव है।
गौरतलब है कि दमोह के मिशन अस्पताल में लंदन के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. एनजोन केम के नाम पर फर्जी डॉक्टर ने ढाई महीने में 15 हार्ट ऑपरेशन कर डाले।
उस पर आरोप है कि दिसंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच हुए इन ऑपरेशन में 7 मरीजों की मौत हो गई।
इसका खुलासा तब हुआ जब एक मरीज के परिजन ने संदेह होने पर डॉक्टर की शिकायत की।
इसके बाद मामला मानवाधिकार आयोग तक जा पहुंचा।
वही, आयोग की टीम अभी दमोह में ही है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मुकेश जैन ने बताया कि फरवरी माह में मिशन अस्पताल में हुई सभी सर्जरी और डॉक्टर्स की जानकारी मांगी थी। लेकिन, अस्पताल प्रबंधन ने डॉ. एन जॉन केम के बारे में नहीं बताया। इसकी 5 मार्च को रिपोर्ट कलेक्टर सुधीर कोचर को दी गई।
एक बार फिर मिशन अस्पताल से डॉक्टर के दस्तावेज मांगे गए, तब अस्पताल प्रबंधन द्वारा जो दस्तावेज दिए गए उसमें बताया गया कि आरोपी डॉक्टर ने कोलकाता यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस और एमडी की डिग्री की है और कार्डियोलॉजी की डिग्री पॉन्डिचेरी से की है।
सभी दस्तावेजों का सत्यापन करने के लिए हमने सागर मेडिकल कॉलेज को पत्र लिखा। उनका जवाब आया कि वहां कार्डियोलॉजिस्ट विभाग नहीं है। इसलिए जबलपुर मेडिकल कॉलेज से जांच की मांग कीजिए।इसके बाद 4 अप्रैल को जबलपुर मेडिकल कॉलेज में इसकी जांच के लिए पत्र लिखा गया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मुकेश जैन ने आगे बताया कि टीम ने जब डॉक्टर की डिग्री की जांच की तो उसमें पॉन्डिचेरी विश्वविद्यालय के चांसलर के रूप में पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के हस्ताक्षर थे। इस बात का सत्यापन करने के लिए जब टीम ने गूगल पर पूर्व राष्ट्रपति हामिद अंसारी के हस्ताक्षर चेक किया तो डिग्री में मौजूद हस्ताक्षर और वास्तविक हस्ताक्षर में अंतर मिला। इससे स्पष्ट हो गया कि आरोपी डॉक्टर की कार्डियोलॉजिस्ट की डिग्री भी फर्जी है।
डिग्री में संदेह का एक प्रमुख कारण यह भी था कि उसकी डिग्री में न तो एनरोलमेंट नंबर था और न ही रोल नंबर। जब इस बात की पुष्टि हो गई कि डॉक्टर के दस्तावेज फर्जी है, तब जाकर टीम ने कोतवाली में आरोपी डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।
सीएमएचओ डॉ. मुकेश जैन ने रविवार को कोतवाली थाना में फर्जी डॉक्टर नरेंद्र जॉन पर एफआईआर दर्ज करवाई। दो अन्य को भी मामले में आरोपी बनाया गया है।
पुलिस ने सोमवार को ऑपरेशन के दौरान जान गंवाने वाले रहीसा बेगम के बेटे नबी बेग और शिकायतकर्ता कृष्णा पटेल के बयान लिए।
मिशन अस्पताल में हुई सात मौतों में से पांच पीड़ितों के नाम सामने आए हैं। इनमें सत्येंद्र सिंह राठौर (लाडनबाग हथना), रहीसा बेग (पुराना बाजार नंबर-2), इजरायल खान (डॉ. पसारी के पास), बुद्धा अहिरवाल (बरतलाई पटेरा) व मंगल सिंह राजपूत (बरतलाई पटेरा) शामिल हैं। सभी दमोह जिले के निवासी थे। इन मौतों के लिए नरेंद्र यादव को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
वही, पीड़ितों के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा उन्हें गुमराह किया और भारी भरकम फीस वसूलने के बाद भी बिना पोस्टमार्टम के शव सौंप दिया गया।
मिशन अस्पताल की प्रबंधक पुष्पा खरे ने आरोपी डॉक्टर का नंबर पुलिस को उपलब्ध करवाया था। साइबर सेल नंबर ट्रेस कर रही थी। मामला सामने आने के बाद भी पुष्पा लगातार डॉक्टर के संपर्क में थी। दोनों की 6 और 7 अप्रैल को बात हुई थी।
पुष्पा ने पुलिस को बताया कि डॉक्टर ने कहा था कि मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, जिसे जो करना है कर लो।
दमोह पुलिस डॉक्टर को पकड़ने के लिए साइबर टीम की मदद ली। उसकी मोबाइल लोकेशन उत्तरप्रदेश के प्रयागराज में मिली। सोमवार सुबह टीम यहां से रवाना हुई। शाम करीब 4 बजे प्रयागराज पहुंची तो आरोपी का मोबाइल बंद मिला।
इधर, दमोह साइबर टीम के राकेश अठया और सौरभ टंडन लोकेशन ट्रैस कर रहे थे। पता चला कि डॉक्टर ने प्रयागराज में एक व्यक्ति से बात की है। उसकी कॉन्टैक्ट लिस्ट में ये नंबर था।
पुलिस उस नंबर की लोकेशन पर पहुंची तो एक व्यक्ति चिकन बेच रहा था। पूछताछ में दुकानदार ने कुछ भी बताने से मना कर दिया। पुलिस ने सख्ती कर उसका मोबाइल चेक किया। उसमें आरोपी डॉक्टर से उसकी वॉट्सऐप चैटिंग मिल गई। जिसके बाद पुलिस को डॉक्टर का सटीक पता मिल गया।
पुलिस टीम प्रयागराज के औद्योगिक थाना क्षेत्र इलाके में ओमेक्स अदनानी बिल्डिंग 5/11 टावर ए के पास पहुंची। यहां आरोपी डॉक्टर की कार मिल गई। तय हो गया कि आरोपी डॉक्टर यहीं कहीं आसपास है। इसके बाद दमोह पुलिस ने प्रयागराज पुलिस को सूचना देकर जानकारी दी।
जिसके बाद प्रयागराज पुलिस की मदद से घेराबंदी की गई। यहां एक फ्लैट में डॉक्टर छिपा मिला।
रात करीब 11:30 बजे पुलिस उसे दमोह लेकर पहुंची। दमोह पुलिस कंट्रोल रूम में पुलिस अधीक्षक श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने तड़के 4 बजे तक उससे पूछताछ की। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आरोपी तबीयत खराब होने का बहाना कर रहा है। इस कारण उससे अभी कड़ाई से पूछताछ नहीं कर पा रहे हैं। दोपहर में आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद उसे रिमांड पर लेंगे। उसके बाद सख्ती से पूछताछ करेंगे।
बता दे कि दमोह के मिशन अस्पताल पर इससे पहले ह्यूमन ट्रैफिकिंग और धर्मांतरण के आरोप भी लग चुके हैं। जिसके बाद फर्जी और 7 मौतों का मामला 4 अप्रैल को तब सामने आया, जब राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट की।

 

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