जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने मंगलवार को ओबीसी आरक्षण से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए यूथ फॉर इक्वालिटी संस्था की याचिका को खारिज कर दिया। इस फैसले के साथ ही होल्ड पर रखे गए पदों पर नियुक्तियों का रास्ता साफ हो गया है।
ओबीसी आरक्षण के पक्ष में वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कहा कि हाईकोर्ट के इस आदेश ने लंबे समय से रुकी हुई भर्ती प्रक्रिया को गति देने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। होल्ड पर रखे गए पदों पर अब नियुक्ति की बाधा समाप्त हो गई है। यह फैसला लाखों युवाओं के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है।
बता दे कि यूथ फॉर इक्वालिटी संस्था ने याचिका में ओबीसी आरक्षण के तहत 27% आरक्षण को चुनौती दी थी, जिसे हाईकोर्ट ने निराधार मानते हुए खारिज कर दिया। संस्था ने इस मामले में आरक्षण नीति की संवैधानिकता पर सवाल उठाए थे।
हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने यूथ फॉर इक्वलिटी की वह याचिका मंगवार को निरस्त कर दी, पूर्व में जिसकी सुनवाई करते हुए 87 : 13 का फार्मूला तैयार किया गया था। इसी के साथ राज्य में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का रास्ता साफ हो गया है। भर्तियों में 13 प्रतिशत होल्ड पर भी अनहोल्ड किए जाने का पथ प्रशस्त हो गया है। साथ ही ओबीसी आरक्षण को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद का भी पटाक्षेप हो गया है।

