कान्हा टाइगर रिजर्व में नौ दिनो में बाघिन सहित पांच शावकों की मौत से हड़कंप, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

मंडला। कान्हा टाइगर रिजर्व में वन्यजीव प्रेमियों को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। बुधवार को अमाही बाघिन टी-141 और उसके आखिरी बचे शावक की भी इलाज के दौरान मौत हो गई। महज नौ दिनों के भीतर इस बाघ परिवार के सभी पांच सदस्य खत्म हो गए, जिससे वन विभाग और पार्क प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बाघिन और उसके इकलौते बचे शावक को गंभीर हालत में मुक्की क्वॉरेंटाइन सेंटर में भर्ती कराया गया था, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी कर रही थी। लेकिन बुधवार सुबह बाघिन ने दम तोड़ दिया, जबकि शाम को शावक की भी मौत हो गई।
बाघ परिवार में मौत का सिलसिला 21 अप्रैल से शुरू हुआ था जिसमे 21 अप्रैल को पहले शावक की मौत हो गई, 24 अप्रैल को दूसरा शावक मृत मिला, जबकि 25 अप्रैल को तीसरे शावक ने दम तोड़ा दिया फिर 29 अप्रैल को बाघिन और बचे हुए शावक की भी मौत हो गई।
पार्क प्रबंधन के मुताबिक मृत बाघिन की उम्र 8 से 10 साल के बीच थी, जबकि शावक की उम्र 15 से 18 महीने बताई गई है।
शुरुआती जांच में फेफड़ों में गंभीर संक्रमण मौत की बड़ी वजह माना जा रहा है। दोनों के सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए हैं, ताकि संक्रमण की असली वजह सामने आ सके।
एक ही बाघ परिवार के सभी सदस्यों की लगातार मौत ने कान्हा की सुरक्षा, स्वास्थ्य मॉनिटरिंग और वन्यजीव प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आखिर संक्रमण इतना घातक कैसे हुआ???
क्या समय रहते बीमारी की पहचान नहीं हो सकी???
क्या इस त्रासदी को रोका जा सकता था???
इन सवालों के जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएंगे, लेकिन फिलहाल कान्हा ने अपना एक पूरा बाघ परिवार खो दिया है, जिससे वन्यजीव संरक्षण पर चिंता गहरा गई है।

 

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