कान्हा टाइगर रिजर्व में मादा बाघ की दर्दनाक मौत, इस वर्ष का छठा मामला

DR. SUMIT SENDRAM

मंडला। मध्यप्रदेश के प्रमुख वन्यजीव अभयारण्यों में शामिल कान्हा टाइगर रिजर्व से एक बार फिर दुखद हादसा प्रकाश में आया है।
मंगलवार को रिजर्व के मुण्डीदादर वन परिक्षेत्र में स्थित सुलकुम नदी के पास 8 से 10 वर्ष की मादा बाघ का शव मिला है।
गौरतलब है कि इस वर्ष रिजर्व और इसके आसपास के क्षेत्र में बाघ की छठी मौत है।
इससे पहले जनवरी में दो वर्षीय मादा बाघ, फरवरी में 13 वर्षीय बाघिन, मार्च में 5 वर्षीय नर बाघ, अप्रैल में 15 माह की मादा बाघ तथा 6 माह की बाघ शावक की मौत हो चुकी है। इनमें से पांच मौतें पार्क क्षेत्र में और एक पार्क के नजदीक हुई है।
वन विभाग के मुताबिक मादा बाघ दो बड़े पत्थरों के बीच फंसी हुई पाई गई, जिससे उसके भूस्खलन में फंसकर मरने की आशंका जताई जा रही है। हाल ही में क्षेत्र में तेज बारिश हुई थी, जिससे वहां भूस्खलन की स्थिति बनी थी। बाघ की मौत की जानकारी मिलते ही उच्च अधिकारियों ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और मुख्य वन्यजीव संरक्षक के दिशा-निर्देशों के अनुसार तत्काल कार्रवाई की।
वही, डॉग स्क्वॉड की मदद से आसपास के क्षेत्र की गहन जांच की गई, ताकि किसी तरह के शिकार या मानव हस्तक्षेप की संभावना से इनकार किया जा सके।
मौके पर पहुंचे वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. संदीप अग्रवाल एवं डॉ. आशीष वैद्य की देखरेख में बाघ का पोस्टमार्टम किया गया।
प्रारंभिक जांच में बाघ के सभी अंग सुरक्षित पाए गए, जिससे किसी प्रकार के अवैध शिकार की आशंका को नकारा गया है। हालांकि, फॉरेंसिक जांच के लिए नमूने भेजे गए हैं, ताकि मौत के सटीक कारणों की पुष्टि की जा सके।
वन विभाग, तहसीलदार, स्थानीय सरपंच एवं एनटीसीए के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में बाघ का दाह संस्कार विधिवत रूप से किया गया।
वन विभाग के द्वारा वन अपराध प्रकरण दर्ज कर मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।

 

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