मंदसौर। मंदसौर तहसील क्षेत्र के ग्राम लिलदा में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां किसान प्रभुलाल सोधिया की पैतृक जमीन सरकारी रिकॉर्ड से ही गायब हो गई। 70 वर्षीय प्रभुलाल पिछले दो वर्षो से तहसील और कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल सका है।
किसान प्रभुलाल सोधिया के अनुसार उनके पिता के नाम पर ग्राम लिलदा में करीब 2 बीघा जमीन दर्ज थी। पिता के निधन के बाद उन्होंने नामांतरण के लिए आवेदन किया। इस दौरान जब पटवारी से खसरा निकलवाया गया, तो उसमें न तो उनके पिता का नाम मिला और न ही जमीन का खसरा नंबर दर्ज था। हैरानी की बात यह है कि उक्त जमीन अब राजस्व रिकॉर्ड में किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दर्ज दिखाई दे रही है।
बुजुर्ग किसान का कहना है कि वह कलेक्टर की साप्ताहिक जनसुनवाई में 7-8 बार आवेदन दे चुका है, लेकिन हर बार केवल जांच का आश्वासन ही मिला। अब तक न तो पटवारी ने मौके पर जांच की और न ही किसी अधिकारी ने ठोस कार्रवाई की। तहसील कार्यालय में भी उन्हें एक कमरे से दूसरे कमरे तक भटकाया जा रहा है। मामले में जिम्मेदार अधिकारियों का रवैया भी टालमटोल वाला नजर आ रहा है।
मीडिया के द्वारा तहसीलदार से बातचीत करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कैमरे पर कुछ भी कहने से इनकार करते हुए सिर्फ मामला दिखवाने की बात कही गई।
बुजुर्ग किसान प्रभुलाल सोधिया ने भावुक होकर बताया कि इस उम्र में बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाना उनके लिए मुश्किल हो गया है। जमीन के रिकॉर्ड में नाम न होने के कारण उन्हें न तो खाद-बीज मिल पा रहा है और न ही वे अपनी फसल बेच पा रहे हैं। इसके अलावा उनका किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) भी बंद हो चुका है, जिससे आर्थिक संकट और गहरा गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि कलेक्टर स्वयं इस मामले की जांच कराएं, दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई करें और किसान की जमीन का रिकॉर्ड दुरुस्त कर जल्द से जल्द नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कराई जाए।


