भोपाल। राजधानी भोपाल में लोधी समाज द्वारा भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
भेल के जंबूरी मैदान पर यह कार्यक्रम राजा हिरदेशाह लोधी की 168वीं पुण्यतिथि के मौके पर रखा गया था।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोधी समाज को वीरता और किसान योद्धा परंपरा का प्रतीक बताया।
उन्होंने राजा हिरदेशाह लोधी का आजादी का पुरोधा बताया।
सीएम मोहन यादव ने राजा हिरदेशाह लोधी की कर्मस्थली हीरापुर को तीर्थ स्थल के रूप में विकसित करने और उनपर राज्य सरकार द्वारा शोध कराने की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि राजा हिरदेशाह के संघर्ष और शौर्य को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने भी कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में संत दादा गुरु ने बड़ा दावा करते हुए बताया कि मध्यप्रदेश में 1857 से पूर्व नर्मदा तट पर स्वतंत्रता की पहली क्रांति हुई थी। अन्य वक्ताओं ने भी यह बात कही।
केबिनेट मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि यह कार्यक्रम अपने पुरखों के बलिदान को स्मरण करने का है। आज सामाजिक जीवन में शिक्षित होने के साथ संस्कारित बनने का संकल्प भी लेना चाहिए।
कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भी शामिल हुईं।
उन्होंने कहा कि आजादी की दो लड़ाई हुई है। पहली लड़ाई की पूर्णाहूति 15 अगस्त 1947 को हुई थी, यह भूमि-सीमा की आजादी थी। दूसरी आजादी 2014 में पीएम मोदी के नेतृत्व में मिली। यह मन, बुद्धि, विचारों की आजादी थी क्योंकि अंग्रेजों ने हमारे मन-बुद्धि को तोड़ दिया था। अब तीसरी आजादी आर्थिक विषमताओं से मुक्ति के लिए होनी है।
पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कार्यक्रम में आरक्षण के संबंध में अहम बयान दिया। सामाजिक समानता के लिए उन्होंने आरक्षण की जरूरत जताई।
उमा भारती ने साफ कहा कि जब तक अफसर-नेता के परिवार के लोग और गरीब परिवार एक जैसे स्कूल में नहीं पढ़ेंगे, तब तक आरक्षण कोई माई का लाल नहीं छीन सकता।
उन्होंने कहा कि जब तक सुविधाओं में समानता नहीं आ जाती तब तक आरक्षण जारी रहेगा।
कार्यक्रम में संत दादा गुरु ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में पहली क्रांति नर्मदा के तट पर 1842 में शुरू हुई थी, यह तथ्य हम सबको गौरवान्वित करने वाला है। राजा हिरदेशाह ने इसका नेतृत्व किया और अपना बलिदान दिया। उन्होंने बुंदेलों, जनजातियों और सकल समाज को एकजुट कर राष्ट्र के लिए लड़ने को तैयार किया था। नर्मदा के तट से आजादी की क्रांति का पहला बिगुल फूंका गया था। प्रदेश में रानी अवंतीबाई, वीरांगना दुर्गावती जैसी वीरांगनाओं ने अपने राज्य की रक्षा के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर दिया था।
शौर्य दिवस कार्यक्रम की महत्ता जताते हुए दादा गुरु ने कहा कि इस अवसर पर हमें सनातन धर्म के मार्ग पर चलते हुए अखंड भारत के निर्माण में योगदान का संकल्प लेना है। इस आयोजन में जहां धैर्य है वहीं धर्म भी है।


