पुलिस को साइबर अपराधी पकड़ना होगा अब आसान, प्रदेश में शुरू होगी राज्य स्तरीय लैब

DR. SUMIT SENDRAM

भोपाल। साइबर अपराधियों के नए-नए तरीके पुलिस के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। पुलिस उन्हें पकड़ने के लिए जो तरीके निकालती है, वे उससे आगे निकल जाते हैं और कोई रास्ता निकाल लेते हैं। पुलिस भी इन्हें पकड़ने और अपराध के तरीकों की तह तक पहुंचने के लिए डिजिटल फोरेंसिक में मालवेयर, क्रिप्टो और ड्रोन फोरेंसिक को भी शामिल करेगी।
प्रस्तावित राज्य डिजिटल फोरेंसिक लैब में यह सुविधाएं रहेंगी। इससे मालवेयर और क्रिप्टो से साइबर धोखाधड़ी करने वालों को पकड़ना आसान हो जाएगा।
राज्य साइबर मुख्यालय में यह लैब स्थापित की जाएंगी, इसमें साइबर विशेषज्ञों की टीम पदस्थ रहेगी।
पहले इसमें सीडी, डीवीआर, सिम फोरेंसिक की जांच ही प्रस्तावित थी, पर अपराध के बदलते तरीकों को देखते हुए इसका विस्तार किया जा रहा है।
यह लैब अगले वर्ष जनवरी-फरवरी तक प्रारंभ करने की तैयारी है।
अभी इस लैब को स्टेट साइबर मुख्यालय के पास अलग से बनी बिल्डिंग में प्रारंभ किया जाएगा। बाद में अलग से भवन बनाया जाएगा।
इस लैब में साइबर विशेषज्ञों की टीम रहेगी, पद स्वीकृत होने पर इनकी अलग से भर्ती की जाएगी। इसके अतिरिक्त 10 बड़े जिलों में भी साइबर फोरेंसिक लैब प्रारंभ की जाएगी।
बता दे कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पिछले वर्ष नवंबर में साइबर मुख्यालय के निरीक्षण के दौरान साइबर अपराध रोकने के लिए अत्याधुनिक लैब प्रारंभ करने के लिए कहा था।
गौरतलब है कि इस लैब में कंप्यूटर सिस्टम, नेटवर्क, मोबाइल या किसी अन्य डिजिटल डिवाइस में पाए गए मालवेयर (जैसे वायरस, वार्म, ट्रोजन, रैंसमवेयर आदि) की जांच की जाती है। इसमें पता लगाया जाता है कि सिस्टम में मालवेयर कैसे आया?, उसने क्या नुकसान किया, जैसे डेटा चोरी, फाइल डिलीट करना आदि। इसका उपयोग हैकिंग या अन्य किस तरह के अपराध के लिए किया गया या नहीं, कितना नुकसान हुआ।
इससे क्रिप्टोकरेंसी जैसे बिटकोइन आदि से जुड़े लेन-देन, धोखाधड़ी, चोरी, मनी लांड्रिंग और अन्य साइबर अपराधों की जांच और ट्रैकिंग करने में मदद मिलती है। फोरेंसिक विशेषज्ञ ब्लाक चेन एनालिसिस से यह पता करने की कोशिश करते हैं कि ट्रांजेक्शन कहां से शुरू हुआ और कहां गया, किस वालेट ने पैसा भेजा या प्राप्त किया?
इसमें यह पता लगाने की कोशिश रहती है कि ड्रोन का उपयोग कब, कहां, कैसे और किस उद्देश्य से किया गया। इसमें ड्रोन की मेमोरी से डेटा निकालने, जीपीएस डाटा, वीडियो रिकार्डिंग की जानकारी, किस क्षेत्र में कितनी देर तक रहा,फ्लाइट पैटर्न आदि पता किया जाता है।

 

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