मार्वल सिटी हॉस्पिटल में पदस्थ फर्जी के कारण 2024 में एक महिला की हुई थी मौत, प्रकरण दर्ज, जांच में जुटी ओमती पुलिस

DR. SUMIT SENDRAM

जबलपुर। शहर के ओमती थाना क्षेत्र अंतर्गत मार्बल सिटी अस्पताल में जिसको आईसीयू में पदस्थ चिकित्सक बताया गया, वह वास्तव में पेंटर निकला।
फर्जीवाड़ा तब सामने आया जब एक महिला की मौत पर परिजनो ने अस्पताल में चिकित्सकों की जानकारी जुटाई।
महिला के पुत्र का दावा है कि अस्पताल में एक व्यक्ति के नाम पर कोई और चिकित्सक के रूप में मरीजो का ईलाज कर रहा है।
इसकी शिकायत उन्होंने ओमती पुलिस से की है। वही, पुलिस ने मामले की जांच में जुट गई है।
रेलवे के ऑफिसर्स कॉलोनी निवासी मनोज कुमार महावर की मां शाति देवी गत वर्ष सितंबर में अस्वस्थ हुईं। उन्हें शहर के भंवरताल स्थित मार्बल सिटी अस्पताल में भर्ती किया गया। दो सितंबर को शांति देवी की मौत हो गई।
शांति देवी के पुत्र ने अस्पताल से मिले मेडिकल रिकॉर्ड को देखा तो उसमें आईसीयू में उनकी मां के डॉ. बृजराज उइके के निगरानी में ईलाज होने की जानकारी थी। एक सितंबर की देर रात, एक व दो सितंबर की मध्यरात्रि और दो सितंबर को तड़के में डॉ. बृजराज उइके के द्वारा आइसीयू में स्वास्थ्य परीक्षण करना बताया गया।
मनोज महावर उस समय आश्चर्यचकित रह गए जब रिपोर्ट में पढ़ा कि आईसीयू के चिकित्सक डॉ. बृजराज उइके ने उनसे मां को वेंटीलेटर में शिफ्ट करने के लिए बोला था, लेकिन उन्होंने सहमति प्रदान नहीं की। जबकि उस रात आईसीयू के चिकित्सक के साथ उनकी संबंधित मामले में कोई बातचीत ही नहीं हुई थी।
मनोज महावर ने डॉ. ब्रजराज सिंह उइके नाम की जानकारी खंगाली। रजिस्टर्ड चिकित्सक के रूप में डॉ. ब्रजराज का छायाचित्र प्राप्त किया। काफी छानबीन के बाद वह संबंधित नाम वाले चिकित्सक के पते तक पहुंचे। इस दौरान वहां उन्हें जो व्यक्ति मिला उसका चेहरा छायाचित्र से अलग था। उसने अपना नाम ब्रजराज सिंह उइके बताया, लेकिन वह पेंटिंग करने वाला श्रमिक था।
उसे जब चिकित्सक का छायाचित्र दिखाया गया तो उसने उसे पहचान लिया। छायाचित्र सत्येंद्र का होना बताया। सत्येंद्र उसके साथ पढ़ता था। आशंका है कि सत्येंद्र किसी और अभिलेख पर फर्जी तरीके से चिकित्सक बनकर मरीजों का उपचार करता है। पुलिस अब सत्येंद्र के बारे में जानकारी जुटा रही है।
बता दे कि अस्पताल की ओर से रिपोर्ट में दी गई भ्रामक जानकारी से मनोज आहत थे। वे वेंटीलेटर वाली बात पर डॉ. बृजराज उइके से मिलना चाहते थे। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से डॉ. बृजराज उइके से मिलवाने के लिए कई बार बोला, लेकिन वे बात टालते रहे। मनोज को कुछ गड़बड़ होने का संदेह होने लगा।
उन्होंने अस्पताल के कर्मियों से डॉ. बृजराज उइके के आने और मिलने का समय पूछा। इस पर कर्मियों ने अस्पताल में डॉ. ब्रजराज उइके नामक किसी चिकित्सक के कार्यरत होने से मना कर दिया। तब मनोज को यकीन हो गया कि उसके साथ कोई छल किया गया।

 

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