जबलपुर। केन्द्रीय जेल में पिछले सात दिनों से भक्तिरस की धारा बह रही है।
जाने अनजाने में किए गए अपराधों के लिए सजा काट रहे करीब 2800 बंदी श्रीमद् भागवत कथा का पाठ सुन रहे हैं।
आमतौर पर जहां जेल का नाम सुनते ही लोगों के पसीने छूट जाते है, वही केन्द्रीय जेल में पिछले सात दिनों से बंदी भक्तिरस में डूबे नजर आ रहे हैं।
भागवत कथा का आयोजन केन्द्रीय जेल के खुली जेल प्रांगण में किया गया था, वहीं कैदीयों ने कहा कि उन्हें कथा से नई सकारात्मक ऊर्जा एवं जीवन जीने की एक नई दिशा मिली हैं।
जेल अधीक्षक ने बताया कि कथा को सुनने के लिए प्रत्येक दिन बंदियों में उत्साह रहता है और वह उत्साहपूर्वक लगातर सात दिनों से कथा को सुन-समझ रहे हैं।
कथा व्यास श्री अशोकानंद जी महाराज ने व्यास पीठ से कथा वाचन करते हुए सभी को भागवत कथा का महत्व बताते हुए कहा कि इस कथा के श्रवण मात्र से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। भागवत से जीव में भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। विचारों के बदलाव से व्यक्ति के आचरण में स्वयं ही बदलाव हो जाता है। हर कथा का तत्वसार होता है जो कि मन, बुद्धि एवं चित्त को निर्मल कर देता है।
कथा व्यास जी ने कहा कि मानव शरीर ईश्वर का दिया हुआ सबसे बड़ा उपहार है अतः इसे सत्कर्मों के लिए ही उपयोग करना चाहिए।
कथा समापन पर आयोजक केमतानी फाउंडेशन, तारू खत्री, शंकरलाल खत्री, शमन आसवानी, सुरेश आसवानी के द्वारा छप्पन भोग चढ़ाये गए तथा हवन के पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान मप्र पर्यटन निगम के अध्यक्ष विनोद गोटिया ने बंदियों को इस कथा से सीखे गुणों को अपने जीवन में उतारकर आगे अपने जीवन बेहतर करने को कहा, साथ ही आयोजकों को आगे भी इसी प्रकार के जनकल्याण के कार्यक्रम करने हेतु प्रोत्साहन एवं शुभकामनाएं दीं।
इस शुभ अवसर पर राष्ट्रीय मानव सेवा के अध्यक्ष श्री शर्मा, एड. अर्पित तिवारी, आशुतोष तिवारी, एड. अमित जैन, मनीष विलथरिया, सुधीर भागचंदानी, डीआईजी साकेत पाण्डेय, डीएसपी नरेश शर्मा, राजू हिरानी, रचित दीक्षित, रमेश पुरूषवानी, आशीष केमतानी, कौशल्या देवी केमतानी आदि शामिल रहे।


