जबलपुर। नेहरू केंद्रीय विश्वविद्यालय कैंपस में स्थित इंडियन कॉफी हाउस में विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया।
शिविर में 140 इंडियन कॉफी हाउस वर्क्स सदस्यों ने रक्तदान किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कलेक्टर एवं रेड क्रॉस सोसायटी अध्यक्ष दीपक सक्सेना, सचिव आशीष दीक्षित, एग्जीक्यूटिव मेंबर डॉ सुनील मिश्रा, जबलपुर नेहरू केंद्रीय विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रदीप कुमार मिश्रा, वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा नायर एवं प्राइवेट मेडिकल डॉक्टर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. मकसूद चिश्ती एवं एम प्रकाशन सुनील एवं अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
इंडियन कॉफी हाउस कोऑपरेटिव सोसायटी ने अपना कारोबार 1958 में बहुत ही साधारण तरीके से 1,365.00 रुपये की मामूली पूंजी, 16 सदस्यों द्वारा जबलपुर शाखा के साथ शुरू किया था। यह सोसायटी मध्य प्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 के तहत पंजीकृत है। वर्तमान अध्यक्ष सह मुख्य महाप्रबंधक डॉ. ओके राजगोपालन ने सोसायटी को आज की स्थिति तक पहुंचाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
महाप्रबंधक अध्यक्ष डॉ. ओके राजगोपालन कई दिलचस्प विशेषताएं बतायी, उन्होंने बताया कि समिति को दिन-प्रतिदिन मजबूत और अधिक स्थिर बनाती हैं, सबसे पहले यह एक श्रमिक सहकारी समिति है और केवल श्रमिक ही इसके सदस्य और शेयर धारक हो सकते हैं। इस प्रकार श्रमिकों की समिति में दोहरी भूमिका होती है। यानी वे मालिक होने के साथ-साथ श्रमिक भी होते हैं। श्रम शोषण की कोई संभावना नहीं है। जाति, पंथ, क्षेत्र या धर्म के किसी भी भेदभाव के बिना सभी को समान विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं। शासन श्रमिकों के हाथ में है। लोकतांत्रिक तरीके से, प्रबंध समिति का चुनाव श्रमिकों के बीच से, गुप्त मतदान प्रणाली द्वारा किया जाता है। उच्च पदों पर कोई सीधी भर्ती नहीं होती है। सभी को सबसे निचली श्रेणी में नियुक्त किया जाता है और फिर चरणबद्ध तरीके से पदोन्नत किया जाता है।
सेक्रेटरी एम प्रकाशन ने बताया की ये सभी विशेषताएं श्रमिकों की जिम्मेदारी को बढ़ाती हैं और वे संगठन की प्रगति में अपने हिस्से के बारे में जागरूकता के साथ सब कुछ कर रहे हैं। यह मजदूरों का, मजदूरों के लिए और मजदूरों द्वारा बनाया गया संगठन है।


