इंदौर। जनहित के लिए जमीन देने वाले एक शख्स को 24 सालों बाद मुआवजा मिल सका। यह नगर निगम में मुआवजे का अपने आप में अनूठा मामला है।
वर्ष 2000 में जनहित को देखते हुए श्याम तिवारी ने माणिक बाग क्षेत्र में अपना 1500 स्केयर प्लॉट सड़क के लिए शासन को दे दिया था।
तब कहा गया कि आपको दूसरी जगह जमीन दे दी जाएगी। लेकिन, तब से अब तक वे इंतजार करते रहे। अधिकारियो के चक्कर काटते रहे। इतने वर्षो के संघर्ष के बाद उन्होंने उम्मीद छोड़ दी थी। इस बीच वे एक दिन वर्तमान महापौर पुष्य मित्र भार्गव से मिलने पहुंचे।
महापौर ने नियम खंगाले तो उन्हें मुआवजा देने का रास्ता निकल आया। शासन से प्रस्ताव मंजूर होते ही श्याम तिवारी को 59.60 लाख रुपए का चेक सौंप दिया। खास बात ये है कि सड़क या विकास कामों के लिए जमीन लेने पर क्षतिपूर्ति राशि देने का ये आखिरी मामला है, क्योंकि उसके बाद जमीन के बदले टीडीआर सर्टिफिकेट का एक्ट आ गया।
श्याम तिवारी कुछ वर्षों पहले तक त्रिवेणी नगर क्षेत्र में रहते थे। वहीं पर उनकी जमीन थी। गुरु नानक नगर और त्रिवेणी कॉलोनी में सड़क के लिए उन्होंने वर्ष 2000 में जनहित में अपनी जमीन दी। नियम भी अलग थे। तब से अब तक 5 महापौर और परिषद बदल गई, लेकिन तिवारी परिवार का संघर्ष खत्म नहीं हुआ।
मुआवजा नहीं मिल सका। पिछले साल वे महापौर पुष्यमित्र भार्गव से मिले। महापौर ने एक्ट व दस्तावेज खंगाले तो पता चला कि तिवारी परिवार पुराने एक्ट की वजह से क्षतिपूर्ति राशि का हकदार है।
महापौर ने ही पहल की और निगम से पूरा रिकॉर्ड निकलवाया। प्रस्ताव बनवाकर जिला प्रशासन को भेजा ताकि प्रक्रिया में देर न हो। आखिरकार सभी तथ्यों की जांच और महापौर और अधिकारियों के प्रयास के बाद तिवारी परिवार का इंतजार खत्म हुआ और उन्हें महापौर ने 59.60 लाख रुपए का चेक सौंपा।
बता दे कि वर्ष 2000 में गुरुनानक नगर और त्रिवेणी कॉलोनी में सड़क बनाने के लिए उनकी जमीन अधिग्रहित की गई थी। उनका करीब 1500 स्केयर फीट प्लॉट सड़क निर्माण की जद में आ रहा था। उस समय तिवारी परिवार को मुआवजा देने या जमीन के बदले जमीन देने की बात हुई थी, लेकिन सरकार बदल गई। महापौर बदल गए। उन्हें न जमीन मिली और न मुआवजा।
वे लगातार 24 वर्षो से इसका इंतजार कर रहे थे। इसके बाद भी उनका काम नहीं हो सका था। 2023 में उनकी अर्जी महापौर तक पहुंची। उन्होंने पूरी फाइल पढ़ी। इस मामले को देखने के लिए नगर निगम और प्रशासन के अधिकारियों में तालमेल बैठाया। समय-समय पर प्रोग्रेस की डिटेल ली और पूरी प्रोसेस के तहत श्याम तिवारी को मुआवजा दिलवाया।
बुजुर्ग श्याम तिवारी ने बताया कि 24 सालों में महापौर बदल गए, अधिकारी बदल गए पर मुआवजा नहीं मिला। फिर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने फाइलें देखी। सारी प्रोसेस करवाई और हमें मुआवजा मिल गया। अगर पहले मिलता तो काफी अच्छा होता।

