सिंगरौली। जिले में सहकार ग्लोबल कंपनी ने ठेका लेने का काम किया। जिन्होने 83 करोड़ से ज्यादा का टेंडर डालकर अब वह खुद हाईकोर्ट में भी पिटीसन दायर किए हैं।
ऐसे में जिले में रेत की किल्लत बनी हुई है। ज्यादातर लोग ठंड के समय ही निर्माण कार्य कराना चाहते हैं, लेकिन रेत के अभाव में परेशानी उठानी पड़ रही है।
वहीं, शासकीय योजनाओं के तहत भी जो निर्माण कार्य होना था उस पर भी रेत की किल्लत के कारण काम रुक गया है।
सहकार ग्लोवल कंपनी ने रेत का टेंडर लिया, इसके बाद वह खुद हाईकोर्ट में पिटीसन दायर किया। इसके बाद पूरा मामला रेत को लेकर ठंडा पड़ गया है। यहां तो रेत मिलना ही मुश्किल हो गया है। वहीं, हर जगह निर्माण कार्य रेत के अभाव में नहीं हो पा रहा है।
रेत कब मिलेगा, खदानें कब चालू होंगी यह बताने के लिए नेता तैयार नहीं हैं। कारण यह कि वह खुद सेटिंग बनाते देखे गए। जब काम नहीं बना तो सत्ता पक्ष के नेता भोपाल स्तर तक इस पर पाबंदी लगाने का काम किए।
वहीं, सहकार ग्लोबल कंपनी सीधी के नाम पर रेत का टेडर लेकर काम नहीं कर रही है। बल्कि उसी का दो टेंडर सिंगरौली एवं शहडोल से लगे सीधी जिले में भी चोरी-छिपे रेत निकासी का काम कराया जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार भोपाल के वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में खनिज विभाग की टीम भी अब सक्रिय हो गई है, जिसके तहत खनिज अधिकारी (सीधी) एके राय के अनुसार अब तक 45 वाहनों पर कार्यवाही की जा चुकी है। जिसमें आज 4 वाहनों पर भी कार्यवाही हुई है।
सूत्रों की मानें तो एक अलग से टीम भी गठित कर दी गई है। जो कि सोन नदी सहित अन्य नदियों से रेत निकासी कर रहे हैं। उस पर भी निगरानी का काम शुरू कर दिया गया है।
वहीं, खनिज अधिकारी एके राय ने बताया कि कुल 45 वाहनों पर कार्यवाही हुई है, जिसमें कि शहडोल एवं सिंगरौली जिले से माइनिंग अधिनियम का उल्लंघन करते हुए रेत का अवैध परिवहन कर रहे थे। उसके तहत कार्यवाही हुई है।

