दुष्कर्म के आरोपी तहसीलदार के ऊपर पुलिस ने रखा 5 हजार का इनाम, पीड़‍िता बोली कि उसे लाने वाले को मैं दूंगी 50 हजार रूपये

ग्वालियर। तहसीलदार शत्रुघ्न सिंह चौहान पर सिस्टम पूरी तरह से मेहरबान है। पहले दुष्कर्म का आरोप, एफआईआर और इससे पहले के कार्यकाल में ढेरों मुकदमे, इसके बाद भी तहसीलदार पर कोई कार्रवाई नहीं। प्रशासन स्तर से लेकर शासन स्तर तक तहसीलदार को निलंबन तक का नोटिस नहीं दिया गया।
पहले जमीनों के मामले फिर युवती व महिलाओं के मामले में विवादित तहसीलदार का गुपचुप तबादला बैतूल हो गया और पुलिस तक को यह खबर नहीं लगी।
रही बात सिस्टम की तो पूरा सिस्टम आरोपी तहसीलदार शत्रुघ्न सिंह चौहान को बचाने में लगा हुआ है।
अब फरार तहसीलदार शत्रुघ्न सिंह चौहान पर पुलिस ने पांच हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया है। इसके बाद रेप पीड़‍िता ने खुद ही तहसीलदार पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया। आरोपी की तलाश में महिला थाना पुलिस ने टीमों को लगाया है, लेकिन घर पर ताला लगा हुआ है।
सूत्रो के मुताबिक वह ग्वालियर से बाहर है। मोबाइल बंद कर तहसीलदार शत्रुघ्न सिंह चौहान की ओर से लगातार चकमा दिया जा रहा है।
वही, महिला थाना पुलिस ने अब क्राइम ब्रांच को पत्र लिखकर आरोपी तहसीलदार को पकड़ने का सहयोग मांगा है।
गौरतलब है कि शत्रुघ्न सिंह चौहान भितरवार तहसील में पदस्थ थे। महिला की ओर से तहसीलदार पर आरोप लगाकर शिकायत की गई कि उसको शादी का झांसा देकर शोषण किया और दुष्कर्म किया। तहसीलदार ने एक बार गर्भपात भी कराया।
शत्रुघ्न सिंह चौहान पर शादी का झांसा देकर करीब 17 साल तक लिव इन रिलेशन में रखकर रेप करने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। महिला का दावा है कि उसका एक बच्चा भी है, जिसका डीएनए कराने के लिए भी वो तैयार है।
पीड़ित महिला के मुताबिक साल 2006 में उसके पति की मौत हो गई थी, जिसके बाद वो तहसीलदार शत्रुघ्न सिंह के संपर्क में आई और फिर उनके संबंध बन गए। जिसके बाद साल 2014 में उसने एक बेटे को जन्म दिया। रेप के आरोप लगने के बाद तहसीलदार अंडरग्राउंड हो गया है।
शिकायत के सामने आते ही कलेक्टर ने भितरवार तहसीलदार को हटाकर जिला मुख्यालय में लैंड रिकॉर्ड कार्यालय में अटैच कर दिया था। तहसीलदार ने यहां ज्वाइन ही नहीं किया और मेडिकल लगा दिया। इसके बाद महिला की शिकायत पर महिला थाना पुलिस ने तहसीलदार चौहान पर दुष्कर्म का मामला दर्ज किया। दुष्कर्म का मामला दर्ज होने के बाद तहसीलदार का तबादला बैतूल हो गया।
लगातार विवादों में रहे तहसीलदार शत्रुघ्न सिंह चौहान फरार हैं। इससे पहले भी जमीनों के मामले में विवाद सामने आया। तहसीलदार शत्रुघ्न सिंह चौहान दुष्कर्म जैसे मामले में एफआईआर होने के बाद भी वह पकड़ में नहीं आ रहा है, यह थोड़े अचरज की बात है।
आमतौर पर पुलिस सामान्य आरोपियो को जल्द पकड़ लेती है, लेकिन यहां तहसीलदार का मामला है तो वह फरार चल रहा है। जहाँ भ्रष्टाचार के आरोप में जीवाजी यूनिवर्सिटी के कुलपति को बर्खास्त कर दिया गया तो वही प्रशासन का एक तहसीलदार दुष्कर्म जैसे मामले से लेकर डकैती व संगीन धाराओं में अपराध के बाद भी पद पर काबिज है, यह अजब मामला है।
तहसीलदार चौहान ने कोर्ट में जमानत याचिका भी पेश की थी, जिसे कोर्ट ने नामंजूर कर दिया।
कोर्ट ने टिप्पणी में यह भी कहा था कि जिस अधिकारी पर इतने मामले दर्ज हैं, वह नौकरी कर रहा है।
जमानत याचिका का विरोध करते हुए सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया था कि तहसीलदार की न केवल चार पत्नियां हैं, बल्कि उसके अन्य महिलाओं से भी संबंध हैं। इसके अलावा उस पर हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती सहित अन्य धाराओं में भी केस दर्ज हैं

 

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