डिंडोरी जिले से भारत की सबसे बड़ी उद्यमिता यात्रा में चयनित होने वाली पहली प्रतिभागी बनी तनु सोनपाली

डिंडोरी। जिले की बेटी तनु सोनपाली जगृति यात्रा के लिए चयनित होकर डिंडोरी जिले का नाम रोशन किया है।
भारत की सबसे बड़ी उद्यमिता ट्रेन यात्रा है, जिसमें देश और विदेश से आए 55,000 से अधिक आवेदकों में से केवल 500 प्रतिभागियों का चयन किया गया।
तनु सोनपाली डिंडोरी के प्रसिद्ध गल्ला व्यवसाई इन्दर सोनपाली की पुत्री है, वही इनकी माता ममता सोनपाली गृहणी है।
तनु सोनपाली के पिता इन्दर सोनपाली ने बताया कि स्वामी जी के आशीर्वाद से मेरी बेटी तनु को यह उपलब्धी हासिल हुई है।
बता दे कि परिवर्तनकारी सफर जगृति यात्रा पंद्रह दिन और आठ हजार किलोमीटर की ट्रेन यात्रा है, जिसमें प्रतिभागियों को भारत के प्रमुख उद्यमियों, सामाजिक नवप्रवर्तकों और विचारशील नेताओं से मिलने का मौका मिलता है। यह यात्रा युवाओं को समाज और अर्थव्यवस्था से जुड़े चुनौतियों के लिए स्थायी समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित करती है।
गौरतलब है कि फेलोशिप से सामाजिक उद्यमिता तक का सफर वर्ष 2023 में, तनु का चयन सेवा इंटरनेशनल की प्रतिष्ठित फेलोशिप के लिए किया गया। इस फेलोशिप के लिए 14,500 आवेदकों में से केवल 27 प्रतिभागियों का चयन हुआ था। इस अनुभव ने उनके नेतृत्व कौशल को निखारा और उन्हें जमीनी स्तर पर काम करने का व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया। इन अनुभवों ने तनु को शिक्षा के क्षेत्र में प्रणालीगत सुधारों पर ध्यान केंद्रित करने वाले एक सामाजिक उद्यमी बनने की प्रेरणा दी।
तनु की शिक्षा यात्रा डिंडोरी के मदर टेरेसा स्कूल से शुरू हुई। यहां उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की सीमाओं को नजदीक से देखा, जिसने उनके मन में वंचित समुदायों के लिए शिक्षा के अवसर सुधारने का जुनून पैदा किया।
उन्होंने महाराष्ट्र के पालघर जिले के जनजातीय क्षेत्रों में मूलभूत साक्षरता और गणना में योगदान देकर अपने काम की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने बेंगलुरु (कर्नाटक) में प्रवासी बच्चों और सरकारी स्कूल के छात्रों को शिक्षा प्राप्त करने में आने वाली चुनौतियों का समाधान करने पर काम किया।
इन अनुभवों ने उन्हें शिक्षा क्षेत्र की प्रणालीगत समस्याओं को समझने का एक व्यापक दृष्टिकोण दिया।
तनु ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन और पब्लिक पॉलिसी में मास्टर डिग्री प्राप्त की। अपनी पढ़ाई के दौरान उन्होंने नीतियों की व्यावहारिकता पर सवाल उठाना शुरू किया।
“हम नीतियां किसके लिए बना रहे हैं, अगर हम सीधे उनसे जुड़ ही नहीं रहे? उनकी वास्तविकताओं को समझे बिना प्रभावी नीतियां कैसे बनाई जा सकती हैं?” इसका उन्होंने चिंतन किया।
इस सवाल ने उन्हें जमीनी स्तर पर समुदायों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
तनु सोनपाली ने अपने नीति ज्ञान को व्यावहारिक समाधानों के साथ मिलाकर शिक्षा से जुड़ी चुनौतियों का समाधान किया।
तनु की उपलब्धियां उनके जिले के लिए गर्व का कारण बनी हैं।
जगृति यात्रा में डिंडोरी से पहली प्रतिभागी बनकर उन्होंने यह साबित किया है कि दृढ़ संकल्प और जमीनी प्रयासों से सब कुछ संभव है।
अपने अनुभव और दृष्टिकोण के साथ तनु शिक्षा और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में स्थायी बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका यह सफर न केवल डिंडोरी बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा है।

 

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