खंडवा। वृद्धा का हत्यारा किरायेदार का बेटा ही निकला। किरायेदार के बेटे शैलेंद्र सिंह ने वृद्धा को घर में अकेली पाकर पहले उसके साथ दुष्कर्म किया। जब उसने शोर मचाया तो आरोपी ने गला घोटकर उसकी हत्या कर दी। जांच में वृद्धा के गले पर नाखूनों के निशान थे, पुलिस को इसी से हत्या की आशंका हुई थी। आरोपी ने दुष्कर्म और हत्या के बाद अपने नाखून कांटे और उन्हें घर के ही डस्टबिन में डाल दिए।
आरोपी पुलिस से बचने के लिए साक्ष्य मिटाने के भरपूर प्रयास किया, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया। पुलिस ने आरोपी का मोबाइल ट्रेसिंग पर डाल दिया। मोबाइल की लोकेशन बड़वानी में मिली। महाराष्ट्र भागने से पहले ही बड़वानी पुलिस की मदद से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और आरोपी ने अपना कुकृत्य भी स्वीकार कर लिया।
कंट्रोल रूम में पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार राय ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची। तब घर का सामान बिखरा पड़ा था। महिला के बेटे और बहू बाहर गए थे। परिजनो ने बताया कि घर में 45 हजार रुपये थे, वो भी गायब है। घर का सामान भी बिखरा पड़ा था, वृद्धा के मुंह पर तकिया पड़ा हुआ था। इससे पुलिस को पहले आशंका थी कि ये चोरी या लूटकर हत्या का मामला है।
इस दौरान जब पुलिस घटनास्थल पहुंची तो आरोपी शैलेंद्र गुमराह करने के लिए घर के दरवाजे पर ही बैठा रहा। जैसी ही पुलिस पहली मंजिल पर घटनास्थल पहुंची। इसी दौरान आरोपी मौके से फरार हो गया। इस पर पुलिस को शंका और गहरा गई।
जांच में पुलिस को 45 हजार घर में ही मिले तो चोरी या लूट की आशंका भी खत्म हो गई। इस पर पुलिस ने अन्य साक्ष्य जुटाना शुरू कर दिया। इसी दौरान पुलिस को डस्टबिन में नाखून पड़े मिले।
आरोपी शेलेंद्र सिंह के पिता पोस्ट ऑफिस इंदौर से सेवानिवृत्त हुए थे। परिवार बड़वानी का रहने वाला है। आरोपी की मौसी खंडवा में रहती थी। इसीलिए उसके माता-पिता भी खंडवा आ गए थे। यहां वृद्धा के घर में तीन माह पहले ही किराये से रहने आए थे। आरोपी पिछले 17 महीने से महाराष्ट्र में रह रहा था। आठ दिन पहले ही वो अपने माता-पिता के पास खंडवा आया था और रविवार को वृद्धा को घर में अकेली पाकर वारदात को अंजाम दे दिया।
आरोपी शेलेंद्र सिंह की मां उसकी इस हरकत से काफी आहत नजर आई। पुलिस आरोपित को लेकर जब घटनास्थल पर क्राइम सीन रिक्रेट करने पहुंची तब उसकी मां भी वहां मौजूद थी। आरोपी बेटे को देख उसने कहा कि साहब यह जीने लायक नहीं है, इसे तो मार डालो।
वहीं, वृद्धा के परिजन बोले कि हमने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि कोई ऐसा कर सकता है। उसे रुपये चाहिए थे तो ले जाता, लेकिन हत्या क्यों की। हालांकि इस समय तक परिवार को वृद्धा के साथ हुए दुष्कर्म की जानकारी नहीं थी।
कोतवाली प्रभारी (निरी) अशोक सिंह चौहान एवं उनकी टीम के उपनिरिक्षक संतोष सांवले, मनोज दवे, सहा. उपनिरीक्षक विनय राजपूत, प्रधान आरक्षक श्रवण लौवंशी, इरशाद, कमल पचोले, लतेशपाल सिंह तोमर, अमित यादव, अनिल वछाने, विनोद, विजय गेहलोद, भारती, नगर सैनिक ललिता, सायबर सेल के उपनिरीक्षक गणेश पाटीदार, प्रधान आरक्षक जितेंद्र राठौर, विकम वर्मा आदि का इस वारदात को सुलझाने में अहम योगदान रहा।
पुलिस अधीक्षक ने टीम को 10 हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की।

