कभी पर्यटको का अभाव रहने वाले माधव टाइगर रिजर्व में पर्यटको का हो रहा लगातार इजाफा, टाइगर का दीदार करने पहुंच रहे पर्यटक, पार्क प्रबंधन निजी ऑपरेटरों से कराएगा सफारी

शिवपुरी। जिले के माधव टाइगर रिजर्व में अब टाइगरों की संख्या 6 हो गई है, वही पार्क में एक और नर टाइगर लाया जा रहा है।
कभी पर्यटको का अभाव रहने वाले इस पार्क में टाइगरो के आ जाने से लगातार पर्यटकों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इसके चलते अब माधव टाइगर रिजर्व प्रबंधन भी निजी ऑपरेटरों के जरिए जंगल सफारी कराने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए बेहतर प्रपोजल का इंतजार है।
उधर जंगल सफारी वाहनों को लेकर पहले की तरफ सख्ती भी नहीं रही है। अब सामान्य वाहन को भी मॉडिफाई कराकर सफारी वाहन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
बता दे कि वर्तमान में माधव टाइगर रिजर्व प्रबंधन के पास जंगल सफारी के लिए दो वाहन हैं। पहले तो इतने वाहन भी पर्याप्त थे, लेकिन अब पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। 10 मार्च को पन्ना से आई बाघिन को छोड़ने के बाद से अब तक करीब 400 से अधिक पर्यटक यहां आ चुके हैं। शनिवार-रविवार को तो हालत ये होती है कि सफारी वाहनों को दिन में 49 राउंड तक लगाने पड़ते हैं।
आकड़ो के मुताबिक जुलाई 2024 से अब तक 10 हजार से अधिक पर्यटकों ने टाइगर रिजर्व का भ्रमण किया है। जिस रफ्तार से पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है, उसको देखते हुए अब सफारी वाहनों की संख्या कम पड़ने लगी है।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्रदेश के नौवे टाइगर रिजर्व के लोकार्पण समारोह के दौरान दो सफारी वाहनों की मांग प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से की थी। प्रबंधन भी पहले इन वाहनों का ही इंतजार कर रहा था, लेकिन अब इस योजना में बदलाव किया गया है।
पहले जंगल सफारी वाहन भी सिक्स प्लस वन में पास होता था। जिससे वाहन चालक के अलावा छह लोग ही बैठते थे। अब आरटीओ में जंगल सफारी वाहनों को 2 प्लस 6 में पास किया जा सकेगा। जिससे वाहन में अधिक लोग बैठ सकेंगे।
पर्यटकों के बढ़ने से अब निजी आपरेटर भी जंगल सफारी के लिए वाहन लगाने की मंशा जाहिर कर रहे हैं। ऐसे में टाइगर रिजर्व प्रबंधन को न तो वाहन खरीदने पर पैसा खर्च करना होगा न ही मेंटेनेंस आदि का झंझट रहेगा। अब प्रबंधन इस बेहतर प्रपोजल मिलने का विचार कर रहा है। हालांकि अभी ये भी तय होना है कि इसके लिए निजी ऑपरेटर को सभी वाहन का ठेका दिया जाएगा या शुल्क निर्धारण होगा। क्योंकि यदि ठेका दिया जाता है तो फिर किसी एक कंपनी के पर्याप्त वाहन लगाने की जिम्मेदारी होगी। शुल्क निर्धारण होने पर क्षेत्र के लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर खुलेंगे। क्योंकि लोग अपने वाहन अटैच कर निर्धारित शुल्क चुकाकर जंगल सफारी करा सकेंगे।
सिंह परियोजना के निदेशक उत्तम शर्मा ने बताया कि अब हम जंगल सफारी के लिए वाहन नहीं खरीदेंगे। वैसे भी अब जंगल सफारी के लिए विशेष वाहन का नियम खत्म हो चुका है, सामान्य वाहन को भी मॉडिफाई कराकर जंगल सफारी में इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही अब जंगल सफारी वाहन 2 प्लस 6 में पास होगा। अब निजी ऑपरेटरों खुद वाहन लगाएंगे, इसलिए हमें वाहन खरीदने की जरूरत नहीं है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने लगी है इसलिए निजी वाहन आपरेटरों का रूचि दिखाना स्वाभाविक है।

 

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