95 वर्षीय बुजुर्ग माँ को कलयुगी बेटे ने तपती गर्मी में छोड़ा छत पर, गुमनाम पत्र पाकर कलेक्टर ने भेजी रेस्क्यू टीम

DR. SUMIT SENDRAM

जबलपुर। शहर के गोहलपुर थाना क्षेत्र के त्रिमूर्ति नगर में एक किराना व्यवसाई ने अपनी 95 वर्षीय की बुजुर्ग माँ को तपती धूप में छत पर छोड़ दिया। यह खुलासा एक गुमनाम पत्र से हुआ, जिसे कलेक्टर दीपक कुमार सक्सेना को भेजा गया था।
पत्र में बताया गया कि बुजुर्ग महिला को उसके बेटे ने गर्मी में तिरपाल के नीचे मरने के लिए छोड़ दिया है। यहां बुजुर्ग को खाने-पीने तक के लाले हैं।
जिसके बाद कलेक्टर दीपक कुमार सक्सेना ने आधारताल तहसीलदार को जांच के लिए निर्देश दिया।
बताए गए स्थान पर तहसीलदार जानकी उइके, पटवारी मोंटी साहू सहित गोहलपुर थाना पुलिस टीम पहुंची और बुजुर्ग को रेस्क्यू किया।
छत पर बैठी बुजुर्ग महिला की गंभीर हालत देख तहसीलदार ने तत्काल उसे छत से नीचे ले जाकर सुरक्षित स्थान पर बैठाया।
इस दौरान तहसीलदार जानकी उइके ने बुजुर्ग से पूछा कि अम्मा कुछ तकलीफ है? इस पर वह कुछ नहीं बोली, चुप ही रही।
जानकारी के मुताबिक कलेक्टर को भेजे गए गुमनाम पत्र में लिखा था कि त्रिमूर्ति नगर के रहने वाले किराना व्यापारी मेवालाल गुप्ता ने अपनी माँ रामरती गुप्ता को छत पर छोड़ दिया है। यहां कड़ी धूप से बचने के लिए महज तिरपाल लगी है।
पत्र में बताया गया कि बुजुर्ग महिला के खाने-पीने की भी उचित व्यवस्था नहीं है। इतना ही नहीं वह छत पर ही शौच आदि करती है। पत्र मिलने के बाद कलेक्टर ने फौरन तहसीलदार को मौके पर भेजा और जांच शुरू की।
तहसीलदार जानकी उइके की जांच में सामने आया कि महिला ने करीब छह महीने पहले अपनी संपत्ति और घर इकलौते बेटे मेवालाल गुप्ता के नाम कर दिया था। इसके बाद से बेटे ने उसे छत पर छोड़ दिया और परेशान करना शुरू कर दिया। गर्मी के इस मौसम में बुजुर्ग महिला केवल तिरपाल के नीचे धूप और गर्मी से बचने की कोशिश कर रही थी।
महिला के बेटे मेवालाल गुप्ता ने तहसीलदार से कहा कि वह अपनी माँ को घर में रखने के कारण परेशानियों का सामना कर रहा था, इसलिए उसे छत पर रखा।
हालांकि, तहसीलदार ने मेवालाल को सख्त चेतावनी दी कि अगर फिर से ऐसी कोई शिकायत मिलती है, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
तहसीलदार ने बुजुर्ग महिला की सुरक्षा के लिए उसे छत से नीचे उतारकर एक कमरे में रखवा दिया है। जांच रिपोर्ट तैयार कर ली गई है, जिसे सोमवार को कलेक्टर को सौंपा जाएगा।
वही, कलेक्टर के आदेश पर यह तय किया जाएगा कि बुजुर्ग रामरती को वृद्धा आश्रम भेजा जाएगा या फिर वह अपने घर में ही रहेगी। अगर बुजुर्ग के बेटे के खिलाफ कोई गंभीर आरोप साबित होते हैं, तो उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की जा सकती है।

 

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