सीधी। जिला कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी द्वारा जनता के हितों के लिए एक बड़ा आदेश जारी किया गया है, जिसमें प्रायवेट स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए उनके द्वारा गाईडलाईन जारी की गई है।
यदि इसका पालन नहीं होता तो संबंधित निजी विद्यालयों के खिलाफ कार्यवाही भी हो सकती है। यदि इसका पालन हो गया तो अभिभावकों की तरफ से कलेक्टर की बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है।
कलेक्टर द्वारा बीते 1 मई को जारी आदेश क्रमांक 2583/मान्यता/फीविअ./शिक्षा/2024 मध्य प्रदेश राजपत्र क्रमांक 474 भोपाल दिनांक 4 अप्रैल 2024 के संबंध में समस्त अशासकीय विद्यालय संचालक/प्रबंधन एनसीईआरटी/एसईटीआरटी द्वारा प्रकाशित पुस्तकें निजी स्कूलों के संचालकों द्वारा छात्र-छात्राओं एवं पालकों को निर्धारित दुकानों से एवं यूनिफार्म जूते, टाई, कॉपीयां, बैग आदि क्रय करने हेतु बाध्य नहीं किया जा सकेगा। गुणवत्तापूर्ण एवं सर्वसुलभ शिक्षा व्यवस्था लोक कल्याणकारी प्रशासन के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण उद्देश्यों में से एक है।
स्कूल संचालकों एवं गणवेश विक्रेताओं द्वारा पालकों को पुस्तकों का पूरा सेट जिसमें आवश्यकता से अधिक कॉपीयां, महंगी किताबें एवं अन्य स्टेशनरी हेतु बाध्य किया जाता है। जिससे गरीब वर्ग के पालकों को अत्यधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
संचालकों द्वारा इस प्रकार बनाए गए एकाधिकार को खत्म करने तथा विभिन्न माध्यमों से प्राप्त सुझावों से ये समाधान हो गया है कि सीधी जिले के सभी निजी विद्यालयों द्वारा की जा रही इस एकाधिकार प्रवृत्ति से लोक प्रशांति विक्षुब्ध न हो तथा इसका निवारण अत्यंत वांछनीय होने से इसे रोंकने हेतु कार्यवाही किया जाना अत्यंत आवश्यक है।
जिला कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144(1) एवं (2) के तहत स्कूल संचालकों, पुस्तक प्रकाशकों एवं शैक्षिक सामग्री/गणवेश विक्रेताओं के एकाधिकार को समाप्त करने हेतु निर्देश जारी किया है जिसमें कि स्कूल संचालक/प्राचार्य, विद्यार्थी एवं उनके अभिभावकों को सूचीबद्ध पुस्तकें परीक्षा परिणाम अथवा उसके पूर्व क्रय करने हेतु बाध्य नहीं करेंगे, अभिभावक सुविधा अनुसार पुस्तकों का क्रय कर सकेंगे। वहीं स्कूल संचालक पुस्तकें, कॉपीयां, सम्पूर्ण यूनिफार्म आदि संबंधित स्कूल/संस्था अथवा किसी भी दुकान/विक्रेता/संस्था विशेष से क्रय किए जाने हेतु बाध्य नहीं किया जाएगा।
वहीं स्कूल संचालक ये सुनिश्चित करेेंगे कि किसी भी स्थिति में पुस्तकों के प्रकाशक/मुद्रक विक्रेता स्कूल परिसर में पुस्तक विक्रय या प्रचार-प्रसार हेतु प्रवेश नहीं करेंगे। विद्यालय प्रबंधन द्वारा यूनिफार्म का निर्धारण इस प्रकार किया जा सकेगा कि कम से कम 3 वर्ष तक इसमें परिवर्तन नहीं होगा। विद्यालय में किसी आयोजन पर किसी भी प्रकार के वेश-भूषा को विद्यार्थियों/पालकों को क्रय हेतु बाध्य नहीं किया जाएगा।
शुल्क को लेकर भी दिया गया आदेश
कलेक्टर द्वारा आदेश दिया गया कि शैक्षणिक सत्र 2024-25 हेतु प्रस्तावित फीस संरचना 3 अनुसार पोर्टल पर अपलोड करेंगे।
निजी विद्यालयों में फीस संरचना में यदि पिछले शैक्षणिक सत्र की फीस की तुलना में 10 प्रतिशत या उससे कम है तो निजी विद्यालय ऐसी प्रस्तावित वृद्धि करने हेतु सक्षम होंगे एवं प्रारूप 3 में फीस वृद्धि करते हुए स्वीकृत मान्य होगा। यदि पिछले शैक्षणिक सत्र की फीस की तुलना में 10 प्रतिशत से अधिक किंतु 15 प्रतिशत या उससे कम है तो जिला समिति प्रस्तावित फीस संरचना पर 45 कार्यदिवसों में निर्णय लेगी। यदि फीस संरचना में वृद्धि पिछले शैक्षणिक सत्र फीस की तुलना में 15 प्रतिशत से अधिक है तो जिला समिति 7 कार्य दिवसों के भीतर प्रस्ताव राय समिति को प्रेषित करेंगे। विद्यालय प्रबंधन गणवेश को छोंडक़र किसी भी पाठ्य सामग्री पर विद्यालय का नाम उल्लेखित नहीं करेंगे। ये भी निर्देशित किया गया है कि जिला अंतर्गत निजी विद्यालयों द्वारा उपरोक्त कार्यवाही न करने/शिकायत प्राप्त होने की स्थिति में मप्र निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन) नियम 2017, संशोधित नियम 2020 में वर्णित प्रावधानों के अंतर्गत दंड अधिरोपित कार्यवाही संपादित की जायेगी, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी विद्यालय प्रबंधन की होगी।
जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. प्रेमलाल मिश्रा ने कहा कि कलेक्टर द्वारा जो आदेश दिया गया है सराहनीय कदम माना जाएगा। उन्होने कहा कि निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाना जरूरी है। साथ ही उन्होने कहा कि समस्त शासकीय शिक्षण संस्थाओं के लिए अवकश घोषित किया गया है, जिसमें ग्रीष्मकालीन अवकाश 1 मई से 15 जून 24 तक विद्यार्थियों के लिए एवं 1 मई से 31 मई तक शिक्षकों के लिए तथा दशहरा अवकाश 11 अक्टूबर 24 से 13 अक्टूबर 24 तक, दीपावली अवकाश 29 अक्टूबर से 3 नवंबर 24 तक एवं शीतकालीन अवकाश 31 दिसंबर 24 से 4 जनवरी 25 तक नियत किया गया है।


