समिति सेवक ने किया 12 लाख से अधिक का गोलमाल, सीईओ कार्यवाही करनें में दिखा रहे उदासीनता

सीधी। जिले के अमिरती एवं बमुरी समिति सेवकों के खिलाफ आयुक्त सहकारिता मध्य प्रदेश द्वारा की गई कार्यवाही महज दिखावा साबित हो रही है।
आयुक्त सहकारिता ने संबंधित समिति सेवकों की सेवा समाप्ति का आदेश 03 मई को जारी किया था, लेकिन आज तक उक्त आदेश पर बैंक सीईओ द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई।
जब इस संबंध में उनसे जानकारी चाही गई तो गैर जिम्मेदाराना जबाव देते हुए कहा कि यह मेरे समय का नहीं है। इसलिए जांच टीम द्वारा की गई कार्यवाही का दस्तावेज मांगा गया है।
हैरानी की बात यह है कि आयुक्त सहकारिता ने अपने पत्र में इस बात का साफ उल्लेख किया है कि आपके पत्र क्रमांक शिकायत 2024/311 दिनांक 08 अप्रैल 2024। बावजूद इसके प्रभारी सीईओ चंद्रशेखर पाण्डेय ये कह कर पल्ला झाड़ रहे हैं कि उनके पास जांच प्रतिवेदन की कॉपी नहीं है। इससे भी बड़ी बात ये है कि जब आयुक्त सहकारिता ने ही इस बात की मुहर लगा दी है कि अमिरती एवं बमुरी समिति सेवकों द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से फर्जी पंजीयन, उपार्जन कराने एवं फर्जी तरीके से राशि आहरित करने जैसे गंभीर आरोपों को प्रमाणित पाए जाने पर सेवा से पृथक करने का आदेश किया जाय, लेकिन आयुक्त का आदेश प्रभारी सीईओ की रणनीति के आगे बौना साबित हो रहा है।
आयुक्त सहकारिता द्वारा जारी आदेश में इस बात का साफ उल्लेख किया गया है कि अमिरती समिति प्रबंधक द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से पंजीयन उपार्जन के माध्यम से 12 लाख 74 हजार रुपए से अधिक का गबन किया गया है। ऐसे में दोषी समिति प्रबंधक राजेश कुमार सिंह अमिरती एवं समिति प्रबंधक बमुरी सतेन्द्र सिंह तथा कंप्यूटर ऑपरेटर पवन कुमार पटेल को पदच्युत कर आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने की कार्यवाही करते हुए इस कार्यालय को सूचित करें। बावजूद इसके आयुक्त सहकारिता के आदेश पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है।
राडार पर प्रशासक
इस मामले में दोषी व्यक्तियों के साथ साथ आयुक्त सहकारिता ने संबंधित क्षेत्र के प्रशासकों को भी रडार में लिया है। जारी आदेश में समिति प्रबंधक अमीरती राजेश कुमार सिंह एवं समिति प्रबंधक बमुरी सतेन्द्र सिंह व पवन कुमार पटेल कम्प्यूटर ऑपरेटर विरूद्ध तत्काल अनुशासनात्मक एवं वैधानिक कार्यवाही के निर्देश के साथ साथ उक्त के अतिरिक्त संबंधित संस्थाओं में नियुक्त प्रशासकों द्वारा भी अपने कर्तव्य निर्वहन में चूक की गई है। जिसके संबंध में कोई अभिमत नहीं दिया गया है, प्रत्येक संस्था के प्रशासक के संबंध में विवरणात्मक टीप/अभिमत 07 दिवस के भी प्रेषित कीजिए। जिससे यह साफ हो गया है कि इस कार्यवाही में लापरवाही बरतने वाले प्रशासक भी लपेटे में आ सकते हैं।

 

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