शहपुरा(डिंडोरी)। जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के कारण किसान अपनी पारंपरिक खेती के तरीकों से परेशान हो रहे हैं और अपने खेतों में फसल अवशेषों के प्रबंधन न होने से परेशान है।
इस चुनौती का समाधान खोजने के लिए बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया और स्थानीय कृषि विभाग ने मिलकर किसानों को नई और प्रभावी तकनीक के माध्यम से कृषि सुधार का अवसर प्रदान किया है।
बोरलॉग इंस्टिट्यूट के प्रोजेक्ट अधिकारी डॉ. पंकज कुमार के दिशा निर्देशों एवं कृषि विभाग के अनुविभागीय अधिकारी गुमान सिंह एवं बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया के तकनीकी सहायक चंदन कुमार एवं मनीष भारद्वाज द्वारा प्रखंड शहपुरा के किसान हेतराम साहू एवं करौंदी ग्राम के भीमशंकर साहू के खेतों में बिना जुताई के हैप्पी सीडर द्वारा गेहूं की बुवाई कटाई एवं फसल अवशेष प्रबंधन एवं जलवायु अनुकूल खेती करने और फसल अवशेषों को न जलाने की सलाह दी गई।

