बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया व कृषि विभाग द्वारा शहपुरा व करौंदी में किसानों को बिना जुताई खेतों की बुवाई करने की दी गई जानकारी

शहपुरा(डिंडोरी)। जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के कारण किसान अपनी पारंपरिक खेती के तरीकों से परेशान हो रहे हैं और अपने खेतों में फसल अवशेषों के प्रबंधन न होने से परेशान है।
इस चुनौती का समाधान खोजने के लिए बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया और स्थानीय कृषि विभाग ने मिलकर किसानों को नई और प्रभावी तकनीक के माध्यम से कृषि सुधार का अवसर प्रदान किया है।
बोरलॉग इंस्टिट्यूट के प्रोजेक्ट अधिकारी डॉ. पंकज कुमार के दिशा निर्देशों एवं कृषि विभाग के अनुविभागीय अधिकारी गुमान सिंह एवं बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया के तकनीकी सहायक चंदन कुमार एवं मनीष भारद्वाज द्वारा प्रखंड शहपुरा के किसान हेतराम साहू एवं करौंदी ग्राम के भीमशंकर साहू के खेतों में बिना जुताई के हैप्पी सीडर द्वारा गेहूं की बुवाई कटाई एवं फसल अवशेष प्रबंधन एवं जलवायु अनुकूल खेती करने और फसल अवशेषों को न जलाने की सलाह दी गई।

 

Next Post

जबलपुर चेम्बर ने की "मटर महोत्सव" प्रारम्भ करने की अपील

जबलपुर। जबलपुर चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री ने मांग की है कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा एक जिला एक उत्पाद योजना में जबलपुर जिले को मटर उत्पादन के लिए चयनित किया गया था। जिसका आयोजन जिला प्रशासन ने वर्ष 2021 में दिसम्बर में किया गया था, जिससे मटर उद्योग लाभांवित हुआ […]