इंदौर। मंगल कामना और संकट के नाश के लिए चतुर्थी का व्रत किया जाता है।
माघ मास के कृष्ण पक्ष की संकष्ट चतुर्थी के नाम से मनाई जाती है।
विघ्नों का नाश करने वाले भगवान गणेश से अपने संकट का अंत करने करने के लिए भक्त इस दिन निर्जला व्रत रखते हैं।
पति व संतान की दीर्घ आयु और उनके संकटों का नाश करने के लिए महिलाएं व्रत करती हैं और चंद्रोदय होने पर चांद को अर्घ्य अर्पित कर व्रत का पारणा करती हैं। इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश के दर्शनों के लिए देर रात से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है।
महिलाएं सूर्योदय से निर्जला व्रत रखेंगी जो उदित होते चंद्रमा की पूजा के बाद पूरा होगा। इस दिन गणेशजी को तिल-गुड़ अर्पित किया जाता है, इसलिए इसे तिल चतुर्थी भी कहा जाता है। शहर में चंद्रोदय रात 9.10 बजे होगा।संकष्ट चतुर्थी के लिए
शहर के प्राचीन गणेश मंदिरों में भी विशेष तैयारी की गई है।
खजराना गणेश मंदिर में आज से तीन दिवसीय तिल चतुर्थी मेला भी आरंभ हो गया है।
मेले की शुरुआत सुबह 10 बजे ध्वज पूजन के साथ हुई।
कलेक्टर आशीष सिंह द्वारा मंदिर में ध्वज पूजन किया गया। इसके साथ ही खजराना गणेश को तिल-गुड़ से निर्मित सवा लाख लड्डुओं का भोग भी लगाया गया। ध्वज पूजन के बाद भक्तों को यह लड्डू प्रसाद वितरित किया जा रहा है।
खजराना गणेश मंदिर के मुख्य पुजारी अशोक भट्ट ने बताया कि इस पर्व पर भगवान गणेश, रिद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ को मोती जड़ित पोषाक पहनाई गई। इन विग्रह को स्वर्ण मुकुट धारण कराया गया। इसके अलावा गणेशजी को स्वर्ण चंद्रिका, स्वर्ण छत्र, स्वर्ण तिलक भी लगाया गया।

