इंदौर। संतुलित जलवायु और सर्द हवा के लिए पहचाना जाने वाला इंदौर अब बढ़ती गर्मी, अनियमित बारिश और घटती ठंड का सामना कर रहा है।
इस वर्ष अप्रेल में पिछले कुछ वर्षों की तुलना में अधिक दिन तापमान 40 डिग्री से अधिक रहा।
मई में 25 वर्षो के तापमान का विश्लेषण बताता है कि महानगर में 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान वाले दिनों की संख्या बढ़ रही है। यह स्थिति बारिश और ठंड में भी नजर आ रही है।
पर्यावरणविदों के मुताबिक अब सर्दियों में भी दोपहर में गर्मी महसूस होती है, जबकि बारिश में उमस और तापमान परेशान कर रहा है। मार्च से शुरू होने वाली तपिश फरवरी के अंतिम सप्ताह से ही महसूस होने लगती है और जून के बाद भी गर्म हवा का असर रहता है।
सर्दी का समय छोटा हो गया है। दिसंबर और जनवरी में कई दिन तक तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया जा रहा है।
पूर्व मौसम वैज्ञानिक डॉ. अजय शुक्ला ने बताया कि तेजी से बढ़ता शहरीकरण इस बदलाव का बड़ा कारण है। हरियाली कम होने से तापमान नियंत्रित करने वाली प्राकृतिक व्यवस्था कमजोर पड़ गई है।
पेड़ों की संख्या घटने और वाहनों की संख्या बढ़ने से शहर में अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट तेजी से बढ़ रहा है। इसका अर्थ है कि कांक्रीट और डामर से ढंका शहर दिनभर गर्मी सोखता है और रात में छोड़ता है। कुछ साल से मई में 40 डिग्री से अधिक तापमान वाले दिनों की संख्या बढ़ी है।
पर्यावरणविदों के अनुसार इंदौर का अधिकतम औसत तापमान 30-40 वर्षों में 0.8 से 1.2 डिग्री तक बढ़ा है। पहले अप्रेल-मई में 40 डिग्री से ऊपर तापमान वाले दिन सीमित थे। वर्षों से 15-25 दिन तक तापमान 40 डिग्री पार जा रहा है। सर्दियों में दिसंबर-जनवरी के दौरान न्यूनतम तापमान 8 डिग्री से नीचे जाने वाले दिनों की संख्या घटी है। वर्षा के आंकड़ों में बड़ी गिरावट नहीं दिखती, लेकिन बारिश वाले दिन कम हुए हैं।
पर्यावरणविद डॉ. दिलीप वागेला ने बताया कि वायु प्रदूषण में शहर नॉन-अटेनमेंट सिटी श्रेणी में है, यानी राष्ट्रीय मानकों को पूरा नहीं कर पा रहा है। जल प्रदूषण की स्थिति गंभीर है। दो दशक में तापमान में अंतर है। पहले रात जल्दी ठंडी होती थी। ठंड कड़ाके की होती थी। सावन में झड़ी लगती थी। अब यह कम हो रहा है।
वही, पर्यावरणविद ओपी जोशी के मुताबिक गर्मी के दिन बढ़ोतरी और ठंड के दिनों में कमी आई है। बारिश कम दिनों में ज्यादा तीव्रता से हो रही है। मध्य भारत में हीट वेव की घटनाएं बढ़ी हैं। ठंड की अवधि छोटी हुई है। फरवरी से ही गर्मी, अनियमित मानसून, नवंबर-दिसंबर में ठंड कम पडऩा जैसे मौसमी बदलाव हो रहे हैं।


