खंडवा। ओंकारेश्वर में श्रद्धालुओं को ओंकार पर्वत की परिक्रमा करने में परेशानी हो रही है। बताया गया कि पर्वत पर चल रहे शंकराचार्य संग्रहालय निर्माण के लिए कंपनी ने परंपरागत परिक्रमा मार्ग बंद कर दिया है।
बता दे कि तीर्थनगरी का ओंकार पर्वत सतपुड़ा विंध्याचल पर्वत के बीच बसा है। इस पर शिव का वास होने के साथ ही आसपास बहती नर्मदा-कावेरी नदी जलाधारी का कार्य कर रही है।
प्रदेश सरकार द्वारा ओंकार पर्वत को खंडित कर आदिगुरु शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है। वहीं, 2400 करोड रुपये अन्य कार्यों के लिए स्वीकृत किए गए है। इन नए कार्यो की धीमी गति को लेकर प्रतिक्रियाओ का दौर चल पड़ा है।
पं. श्रीकांत जोशी ने कहा कि अनादिकाल से चली आ रही ओकार पर्व की परिक्रमा मार्ग को रास्ते बदल दिए गए परिक्रमा मार्ग के रास्तों को बदलने से परिक्रमा खंडित हो गई है कई श्रद्धालु यहां आते थे श्रद्धा और भक्ति के साथ ओंकार पर्वत की सात किलोमीटर लंबी परिक्रमा आस्था के साथ करते थे।
क्षेत्रीय अर्जुन नायक ने कहा कि प्रशासन इन्हे सद्धबुद्धि दें। साधु-संत और ब्राह्मण इसका विरोध जता रहे है। विकास के नाम पर प्राचीन धरोहर और परंपरा का विनाश किया जा रहा है। सभी मूक दर्शक बन कर इसे कोस रहे हैं। जिम्मेदारों को इस ओर ध्यान देना चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं की आस्था पर चोट न पहुंचे।
पूर्व पार्षद सुनील सोने ने कहा कि यहां परिक्रमा करने आने वाले श्रद्धालु आते हैं परिक्रमा का रास्ता बदल दिए जाने से काफी दिक्कतें होती है। लोगों ने ओंकार पर्वत की परिक्रमा करने आना बंद कर दिया है। कहीं श्रद्धालु सरकार की व्यवस्था कोसते नजर आते हैं परिक्रमा पूर्व की तरह की जाना चाहिए।


