मैक्स हॉस्पिटल लखनऊ के डॉक्टरों ने एक्यूट बड–कियारी सिंड्रोम का सफल इलाज किया, उन्नत डीआईपीएस प्रक्रिया से टला लिवर ट्रांसप्लांट

प्रयागराज। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल लखनऊ के चिकित्सको ने लिवर की नसों में अचानक हुई रुकावट, एक्यूट बड–कियारी सिंड्रोम के एक दुर्लभ और जानलेवा मामले का सफल इलाज किया। उन्नत और बिना बड़ी सर्जरी वाली प्रक्रिया के जरिए 35 वर्षीय मरीज का लिवर ट्रांसप्लांट टाल दिया गया।
यह सफल ऑपरेशन मैक्स हॉस्पिटल लखनऊ की इंटरवेंशनल रेडियोलोजी और गैस्ट्रो सर्जन टीम के द्वारा किया गया।
मैक्स हॉस्पिटल लखनऊ के निदेशक गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एवं रोबोटिक जीआई सर्जन डॉ. अजय यादव के नेतृत्व में किये गए सफल ऑपरेशन में इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. शाहबाज मोहम्मद खान एवं इंटरवेंशनल रेडियोलोजी के सीनियर कंसलटेंट डॉ. स्विश कुमार सिंह का सराहनीय योगदान रहा।
प्रयागराज में आयोजित पत्रकार वार्ता में मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल लखनऊ के निदेशक डॉ. अजय यादव ने बताया कि प्रयागराज निवासी प्रेमा यादव को अत्यधिक कमजोरी, तेजी से बढ़ता पीलिया, पेट और पैरों में सूजन तथा लगातार उल्टी की शिकायत के साथ मैक्स हॉस्पिटल लखनऊ की इमरजेंसी में लाया गया।
जांच में एक्यूट बड–कियारी सिंड्रोम की पुष्टि हुई।
डॉ. अजय यादव ने आगे बताया कि यह एक गंभीर स्थिति होती है, जिसमें लिवर से खून बाहर ले जाने वाली नसों में अचानक रुकावट या खून का थक्का बन जाता है। इससे लिवर फेल होने का खतरा तेजी से बढ़ सकता है। गंभीर मामलों में अक्सर लिवर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र स्थायी इलाज माना जाता है। हालांकि तुरंत विभिन्न विशेषज्ञों की सलाह के बाद चिकित्सको की टीम ने एक उन्नत और बिना बड़ी सर्जरी वाली प्रक्रिया डायरेक्ट इंट्राहेपेटिक पोर्टोसिस्टमिक शंट (डीआईपीएस) करने का निर्णय लिया।
इस प्रक्रिया में लिवर के अंदर एक नया रास्ता बनाया जाता है, जिससे खून का प्रवाह फिर से सामान्य हो सके और लिवर पर बढ़ा हुआ दबाव कम हो जाए।
टीम के मिलकर काम करने के महत्व पर जोर देते हुए डॉ. अजय यादव ने कहा कि इस मामले में लिवर की तेजी से बिगड़ती हालत को समय पर पहचानना और सभी विशेषज्ञों का तुरंत मिलकर काम करना बेहद जरूरी था। मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए समय पर डीआईपीएस प्रक्रिया करने से उनका लिवर स्थिर हुआ और तुरंत ट्रांसप्लांट की जरूरत नहीं पड़ी। ऐसी अंग-संरक्षण वाली प्रक्रियाएं गंभीर लिवर मामलों में बेहतर परिणाम दे रही हैं।
पत्रकारवार्ता में डॉ. शहबाज़ मोहम्मद ख़ान ने बताया कि मरीज की स्थिति तेजी से लिवर फेल होने की ओर बढ़ रही थी। उनके शरीर में काफी मात्रा में पानी भर गया था और लिवर की जांच रिपोर्ट भी लगातार खराब हो रही थी। लिवर के अंदर एक नया रास्ता बनाकर हमने दबाव कम किया, खून का प्रवाह सामान्य किया और स्थायी नुकसान होने से बचा लिया।
डॉ. स्विश कुमार सिंह ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि तीव्र बड–कियारी सिंड्रोम दुर्लभ है और इसके लक्षण कई बार अन्य लीवर रोगों जैसे लगते हैं, जिससे पहचान में देरी हो जाती है। समय पर सही जांच और विशेषज्ञ केंद्र में रेफरल जीवन बचा सकता है।
उन्होंने आगे बताया कि यह मामला दर्शाता है कि उन्नत इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी के माध्यम से गंभीर रक्तवाहिनी संबंधी लीवर रोगों का इलाज बिना प्रत्यारोपण भी संभव है।
प्रेसवार्ता में बताया गया कि मरीज की हालत में तेजी से सुधार हुआ और उन्हें तीन दिन के भीतर स्थिर स्थिति में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और वह भी बिना लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत के।
यह मामला दिखाता है कि जटिल लिवर बीमारियों के इलाज में उन्नत इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी की भूमिका लगातार बढ़ रही है और मैक्स हॉस्पिटल लखनऊ की अंग बचाने वाली आधुनिक इलाज देने की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।

 

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