भोपाल। पश्चिम-मध्य रेलवे जबलपुर के लिए खरीदे गए गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल्स में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। सीबीआई ने इस मामले में इंदौर की कंपनी सहित रेलवे और राइट्स के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सीबीआई को मिली जानकारी के अनुसार पश्चिम-मध्य रेलवे जबलपुर और इंदौर स्थित कंपनी मे. वाईएबल डायमंड्स के बीच 23 जनवरी 2023 को 3,640 गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मैडल्स की सप्लाई का अनुबंध हुआ था। इन पदकों की कुल कीमत करीब 49.68 लाख रुपए तय की गई थी।
अनुबंध की शर्तों के मुताबिक आरआईटीईएस के निरीक्षण इंजीनियर द्वारा सितंबर और अक्टूबर 2023 में सामग्री का निरीक्षण किया गया था, जिसमें रिपोर्ट में मेडल्स 99.90 प्रतिशत शुद्ध चांदी के पाए गए।
इसके बाद 19 अक्टूबर 2023 को 3,631 मेडल्स भोपाल के कोच रिहैबिलिटेशन वर्कशॉप के जनरल स्टोर डिपो में जमा किए गए, जबकि 9 मेडल्स परीक्षण में उपयोग किए गए थे। मामला उस समय उजागर हुआ जब 12 सितंबर 2025 को रेलवे के विजिलेंस विभाग ने दोबारा सैंपल जांच कराई। नई जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। नोएडा स्थित NABL मान्यता प्राप्त लैब और कोलकाता के नेशनल टेस्टिंग हाउस की रिपोर्ट में पाया गया कि मेडल्स में चांदी की मात्रा मात्र 0.0023 प्रतिशत थी, जबकि तांबे की मात्रा 99.80 प्रतिशत पाई गई, यानी सप्लाई किए गए मेडल्स टेंडर की शर्तों पर खरे नहीं उतरे।
प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर सीबीआई ने 25 मार्च 2026 को मामला दर्ज किया। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 120-B (षड्यंत्र), 420 (धोखाधड़ी), 468 (जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेज का उपयोग) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। सीबीआई ने मामले की जांच एसीबी भोपाल के एएसपी आकाश कुमार मीणा को सौंपी है। एजेंसी अब यह पता लगाएगी कि इस पूरे घोटाले में किन-किन अधिकारियों और व्यक्तियों की भूमिका रही और किस स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई।


