रंगपंचमी पर इंदौर दुनिया को दिखाएगा अपना रंग, गेर में होंगे श्रीनाथजी मंदिर के दर्शन

इंदौर। होली के बाद अब रंगपंचमी पर 19 मार्च को अपना रंग दुनिया को दिखाने की तैयारी में इंदौर जुट गया है। पिछली बार नहीं निकली टोरी कार्नर की गेर इस बार दोगुने उल्लास के साथ निकाली जाएगी। हालांकि इस बार रसिया कार्नर की गेर नहीं निकलेगी।
वही, संगम कार्नर ने चल समारोह की खास तैयारी शुरू कर दी है। इसमें बांके बिहारी के ढोल पर मिसाइल से 200 फीट ऊपर तक रंग उड़ाया जाएगा। मारल क्लब की गेर में बोरिंग मशीन से गुलाल उड़ाया जाएगा। इसके अतिरिक्त हिंद रक्षक संगठन की राधाकृष्ण फाग यात्रा भी निकलेगी।
रंगपंचमी मे सुबह साढ़े नौ से दोपहर तीन बजे तक राजवाड़ा पर जुटने वाले लाखों लोगों को रंग से भिगोएगी। संगम कार्नर की गेर के लिए आठ हजार किलो फूलों से गुलाल बनाया जा रहा है।
कमलेश खंडेलवाल ने बताया कि गेर का यह 75वां वर्ष है। इस बार गेर का प्रमुख आकर्षण बरसाना की टीम लट्ठमार होली के अतिरिक्त बांके बिहारी का ढोल आकर्षण का केंद्र रहेगा। देशभक्ति ओर सद्भावना से ओतप्रोत युवाओं की टोली देशभक्ति के तरानों पर भांगड़ा करती चलेगी।
ओल्ड राज मोहल्ला से निकलने वाली इंदौर की प्रतिष्ठित रसिया कार्नर की गेर इस वर्ष नहीं निकाली जाएगी।
संयोजक पं. राजपाल जोशी के पिताजी और गेर के प्रमुख संरक्षक पं.क्रांति सागर जोशी का कुछ माह पूर्व ही निधन हो गया था, जिसके कारण समिति ने इस वर्ष गेर नहीं निकालने का निर्णय लिया है।
राजपाल जोशी ने बताया कि पिताजी के चले जाने का दुख अभी भी हम सभी के दिलों में है, इसलिए रसिया कार्नर परिवार ने इस वर्ष गेर स्थगित की है। आने वाले वर्ष में इंदौर की जनता को रंगों से सराबोर करने के लिए और भी ज्यादा अच्छी गेर निकालेंगे।
वही, मारल क्लब की गेर का यह 51वां वर्ष है। छीपा बाखल से निकलने वाली गेर के लिए इस बार विशेष तैयारी की जा रही है। इसमें बोरिंग मशीनों से गुलाल बरसाया जाएगा।
आयोजक अभिमन्यु मिश्रा का कहना है कि इसकी तैयारी सदर बाजार में की जा रही है। भजन गायक मनीष तिवारी भी भजनों की प्रस्तुति देते चलेंगे। मशीनों को तोप का स्वरूप दिया गया है। साथ ही पानी के टैंकर भी रहेंगे।
हिंद रक्षक संगठन की राधाकृष्ण फाग यात्रा नृसिंह बाजार से निकलेगी।
संयोजक एकलव्य सिंह गौड़ ने बताया कि यह यात्रा का 27वां वर्ष है। पिछले वर्ष जहां अयोध्या में बने राम मंदिर की प्रतिकृति बनाई गई थी, वहीं इस बार नाथद्वारा का श्रीनाथ मंदिर नजर आएगा। इसके साथ ही भगवान कृष्ण गोवर्धन पर्वत उठाए हुए एक झांकी में दिखेंगे। 100 से अधिक भगवा ध्वजा लेकर युवक व महिलाएं चलेंगी। टेसू के फूलों का प्राकृतिक रंग उड़ाया जाएगा।
सबसे पुराने टोरी कार्नर से निकलने वाली गेर पिछले वर्ष 2024 नहीं निकली थी। संस्थापक शेखर गिरि के बड़े भाई सतीश गिरि का निधन होने से गेर निकालना रद किया गया था। हालांकि उस समय तक गेर की सभी तैयारी पूरी हो चुकी थी।
संस्थापक शेखर गिरि ने बताया कि इस बार दोगुने उल्लास के साथ गेर की तैयारी की जा रही है। इसमें आईआईटी के विद्यार्थी ट्राले पर नृत्य करते नजर आएंगे। गेर की थीम ‘प्यार किया तो डरना क्या’ रहेगा। साथ ही अलग-अलग समाज की महिलाएं भी इसमें बड़ी संख्या में शामिल होगी।

 

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