चार दिन तक मुश्किल से मिलेंगे वाहन, मतदान तिथि के आसपास सर्वाधिक विवाह मुहूर्त, टैक्सी-बस अधिग्रहण से असमंजस में घराती-बराती

सिंगरौली। लोकसभा चुनाव की 3 मतदान तिथि 19 अप्रेल के करीब तीन विवाह तिथियों से वर-वधुओं की के परिवार असमंजस में पड़ गए हैं।
घराती बरातियों को चार दिन तक टैक्सी, बस सड़कों पर नहीं मिलेंगी।उन्हें खुद के ही दोपहिया – चौपहिया वाहन का सहारा लेना पड़ेगा।
भारतीय पंचांग के अनुसार 18, 19 और 20 अप्रैल को विवाह मुहुर्त निश्चित हैं।
इसके हिसाब से विवाह योग्य युवक-युवतियों के लिए संबंधित परिवारों ने चुनाव तिथि से पहले ही वैवाहिक संबंध तय कर रखे हैं। इसके साथ ही राशि के अनुसार विवाह तिथियां तय की गई है। इसी दौरान लोकसभा चुनाव के मतदान हो रहे हैं। इससे संबंधित परिवारों की चिंता टैक्सी, बसों को लेकर है, जिन्हें प्रशासन ने 14-16 अप्रैल से ही अधिग्रहण करने का फैसला किया है। यह सिलसिला 18 अप्रेल तक चलेगा। इससे उनके रिश्तेदार बाहर से विवाह स्थल तक पहुंच पाएंगे या नहीं, यह सवाल बन गया है। इससे घराती-बराती तक पशोपेश में आ रहे हैं।
छोटे वाहनों से निगरानी, बसों से मतदान दल
परिवहन विभाग ने मतदान के मद्देनजर निजी स्कूल व बस तथा चौपहिया वाहनों के संचालकों को वाहन संजय गांधी कालेज ग्राउंड परिसर में खड़ा करने के निर्देश जारी किए हैं। इन वाहनों का उपयोग मतदान दलों को भेजने के साथ निगरानी करने वाले सेक्टर ऑफिसर, माइक्रो ऑब्जर्वर समेत अन्य अधिकारियों को दिया जाएगा। इन्हें मतदान से मुक्ति 20 अप्रेल की दोपहर तक मिल पाएगी, तभी सड़कों पर वाहन आ पाएंगे।
चार दिन तक स्कूलों में बसों और वैन का टोटा रहेगा।
ऐसे में अभिभावकों को खुद ही बच्चों को छोड़ने स्कूल जाना होगा। प्रशासन ने बस के साथ ही टैक्सी, स्कूल वैन, प्राइवेट कार को भी अधिग्रहित किया है।
जिले के संसदीय क्षेत्रों में चुनावी दल को लाने और ले जाने की जवाबदारी अधिग्रहित-बस, वैन, कार पर रहेगी। चुनावी दल के अलावा रिजर्व में भी बसें रखी जाएंगी। इस बसों की तत्काल जरूरत पडने पर उनका उपयोग किया जा सकेगा।

 

Next Post

जिले में 80 फीसदी से ज्यादा फसल की कटाई, खेतों में नरवाई जलाने का बढ़ा खतरा

सिंगरौली। देवसर किसानों के खेतों में तैयार गेहूं फसल की कटाई लगभग 80 फीसदी पूरी हो गई है। इसके साथ ही किसान सफाई के बहाने पराली/नरवाई में आग लगा रहे हैं। इससे पर्यावरण को नुकसान तो पहुंचेगा ही, साथ ही जमीन की उर्वरता भी प्रभावित होगी। जबकि कृषि वैज्ञानिकों ने […]