धार। ऐतिहासिक भोजशाला में हाईकोर्ट और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के ऐतिहासिक फैसले के बाद मंगलवार को ‘महासत्याग्रह’ और ‘महाविजय महोत्सव’ मनाया गया।
हिंदू समाज को साल के 365 दिन पूजन का अधिकार मिलने के बाद भोजशाला परिसर में भारी उत्साह का माहौल है।
मां वाग्देवी की पूजा-अर्चना और अखंड ज्योति स्थापना के साथ शुरू हुए आयोजन पर श्रद्धालुओं ने आतिशबाजी कर जश्न मनाया।
मंगलवार सुबह से ही भोजशाला में भक्ति और आस्था का उल्लास देखने को मिला।
परिसर में आयोजित भजन संध्या में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
हवन और महाआरती के बाद श्रद्धालुओं ने जमकर आतिशबाजी कर अपनी खुशी जताई।
पूरे परिसर में जयकारों के बीच बसंत पंचमी एवं दिवाली जैसा माहौल नजर आया। इस दौरान पुलिस प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था नजर आई।
भोज उत्सव समिति के गोपाल शर्मा ने बताया कि प्रति मंगलवार भोजशाला में सत्याग्रह होता है, लेकिन 365 दिन पूजन के आदेश के बाद यह पहला मंगलवार था। इसीलिए इसे ‘महासत्याग्रह’ का नाम दिया गया। सत्याग्रह के पश्चात अखंड ज्योति मंदिर पर आतिशबाजी कर विजय महोत्सव मनाने के लिए श्रद्धालु अपने-अपने घरों से पटाखे लेकर पहुंचे।
भोजशाला पहुंच रहे श्रद्धालुओं की जुबान पर अब एक ही बात है कि मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा को लंदन से वापस लाया जाए। उनका कहना है कि मां की आत्मा यहां स्थापित हो चुकी है, अब जल्द ही मूल स्वरूप को भी स्थापित किया जाना चाहिए।
बता दे कि रविवार को हिंदू समाज द्वारा मां वाग्देवी के प्रतिकृति स्वरूप की स्थापना कर पूरे दिन अनुष्ठान किए गए थे।
इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ था जब पूरे 24 घंटे तक मां का स्वरूप भोजशाला में विराजमान रहा और अखंड ज्योति प्रज्वलित रही।
अब हिन्दू समाज द्वारा प्रतिदिन यहां मां का पूजन किया जाएगा।


