सीधी। शहर के स्कूलों में लगभग अवकाश हो गया है। परीक्षाएं समाप्त हो गई है। गली से लेकर मोहल्ले बच्चों के नाना तरह के खेले जाने वाले खेल से गूंज रहे है, लेकिन अब डॉग बाइट का खतरा बडे़ रूप में सामने आया है।
लगातार हो रहे डॉग बाइट के बाद अब कहना पडे़गा कि बच्चे अपनी जिम्मेदारी पर ही बाहर निकले, क्योंकि शहर के जिम्मेदार अब असहाय है। वे पैदल नहीं चलते, क्योंकि उनके पास चार पहिंया वाहन है। अब शहरवासी भी मानने लगे है कि जिम्मेदारों की आंखों को संभवत मोतियाबिंद हो गया है, जो बच्चों का दर्द डॉग बाइट के शिकार होने के बाद दिखाई देना ही बंद हो गया है।
शहर में आधा किमी की एक भी रोड ऐसी नहीं है जहां डॉग, मासूमों को अपनी बाइट बनाने के लिए तैयार नहीं बैठा हो।
शहर में लगभग हर दिन अलग-अलग क्षेत्रों में खूंखार श्वानों के हमले से घायल दर्द से तड़पड़े नन्हे बच्चों को लेकर परिजन जिला अस्पताल लेकर निजी अस्पतालों पर पहुंच रहे है।
मयापुर निवासी दो वर्षीय सोहिल को चार-पांच श्वानों ने उस समय हमला कर घायल कर दिया, जब वह अपने पिता के साथ सब्जीमंडी सब्जी लेने जा रहा था। इस दौरान चार-पांच श्वान एक साथ आए और हमला कर सोहिल को नोंच दिया। मासूम बच्चें पर इस तरह हुए हमले को देख आसपास के लोगों ने मिलकर श्वानों को भगाकर बच्चें को उनके चंगुल से निकाला। श्वान के काटने से बच्चे के पेट और कमर पर घाव हुए। वह दर्द से तड़प रहा था, जिले परिजन दोपहर 1.30 बजे निजी अस्पताल लेकर पहुंचा, जहां ड्रेसिंग रूम में दवाई कर इंजेक्शन लगाया गया।
जिला अस्पताल सहित निजी अस्पतालों में श्वानों के हमले से घायल होकर हर दिन 15-20 मामले पहुंच रहे है। बीते वर्ष हरिजन बस्ती की एक महिला को आवारा साड़ ने जख्मी कर दिया था।
महिला पार्षद पूनम सोनी ने इस मामले को लेकर नगरपालिका सहित जिला कलेक्टर से आवारा पशुओं को शहर से हटवाकर गौशालाओं मे भेजवाने की मांग की थी।
बता दे कि गुरुवार को पड़ैनिया में 9 वर्षीय फरोज नामक बालक को भी आठ-दस श्वानों ने घेर कर नोच डाला था, जिसे भी राह चलते लोगों ने श्वानों को भगाकर बचाया था। इसके पहले भी हनुमान मंदिर के पास 10 साल की लड़की को तीन श्वानों ने इसी तरह घायल किया था।


