उज्जैन। जिले में सगाई कार्यक्रम में दहेज प्रथा के खिलाफ मिसाल देखने को मिली। बड़नगर तहसील के बंगरेड गांव में दूल्हे पक्ष ने दहेज लेने से इंकार कर करीब 50 लाख रुपए की पेशकश लौटा दी। इस फैसले की पूरे इलाके में चर्चा हो रही है।
बता दे कि रविवार को बंगरेड के लोटस रिसॉर्ट में तिलक कार्यक्रम हुआ। लोटस ग्रुप के मालिक जितेंद्र सिंह राजावत के बेटे आदर्श दीप राजावत की शादी देपालपुर क्षेत्र (इंदौर) के तामलपुर निवासी किसान महेंद्र सिंह पंवार की बेटी बिंदिया कुमारी से तय हुई।
समारोह में वधु पक्ष ने 25 लाख रुपए नगद और करीब 15 तोला सोना सगाई में देने की पेशकश की। दूल्हा आदर्श और उनके पिता जितेंद्र सिंह राजावत ने इसे लेने से मना कर दिया।
दूल्हे के पिता का कहना था कि हमें दहेज नहीं चाहिए। हमें बहू के रूप में बेटी चाहिए।
उनके इस फैसले से समारोह में मौजूद लोग चौंक गए।
जहां तिलक में दहेज को सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़ा जाता है, वहीं इस तरह का फैसला मिसाल है।
राजावत परिवार ने नगदी और सोना लेने से मना कर दिया। वे विवाह को लेन-देन नहीं मानते। प्रतीकात्मक रूप से केवल एक सोने की अंगूठी स्वीकार की गई, जबकि नगद और बाकी आभूषण लौटा दिए गए।
क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष जितेंद्र सिंह राजावत ने कहा कि विवाह कोई सौदा नहीं है। हमें बहू के रूप में बेटी चाहिए, दहेज का पैसा नहीं। दहेज प्रथा गरीब परिवारों के लिए अभिशाप है और इसे खत्म करने के लिए प्रभावशाली लोगों को आगे आना चाहिए।
समारोह में मौजूद ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने फैसले का समर्थन किया। कई लोगों ने इसे समाज के लिए आईना बताया, जहां दहेज के कारण परिवार आर्थिक दबाव में आते हैं।
फैसले को सामाजिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में दहेज की परंपरा गहराई से जमी हुई है, ऐसे में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आदर्श दीप राजावत और बिंदिया कुमारी का विवाह नवंबर 2026 में होगा। दोनों परिवारों ने तय किया है कि शादी सादगी से होगी। दहेज नहीं लिया जाएगा।


