सीधी। जिले में गिरते जलस्तर को ध्यान में रखकर कलेक्टर ने जिले को जलअभाव ग्रस्त घोषित कर दिया था। साथ ही बोरिंग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया है।
इस रोक के चलते जिले में बोरिंग का काम तो बंद नहीं हुआ लेकिन बोरिंग के रेट जरूर बढ़ गए हैं।
बोरिंग संचालक अब जहां पर भी बोरिंग करने जाते हैं। उसके पहले संबंधित थाने की पुलिस और अफसरों से संपर्क करते हैं और सेंटिग कर धड़ल्ले से बोरिंग करते हैं। यह अवैध कारोबार पूरे जिले में संचालित हो रहा है।इसके बाद भी प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
जिलेभर मे करीब एक दर्जन से अधिक मशीनें धड़ल्ले से बोरिंग कर रही हैं।
बता दे कि जिले में दो दर्जन की तादाद में कथित व्यापारी बोरिंग का काम करते थे। वे दक्षिण भारत से मशीनें किराए पर लाकर यहां निर्धारित दरों पर बोरिंग का काम करते थे। लेकिन प्रतिबंध के बाद अब केवल वे ही व्यापारी बोरिंग का काम कर रहे हैं, जिनकी पुलिस और स्थानीय राजस्व कर्मचारियों से सेटिंग है।
पिछले सीजन तक जिलेभर में करीब एक दर्जन बोरिंग मशीनें चलती थीं। लेकिन इस बार दो दर्जन से अधिक मशीनें बोरिंग का काम कर रही हैं।
वर्तमान में एक दर्जन व्यापारी बोरिंग का काम कर रहे हैं। बोर करने के पहले संबंधित थाने में संपर्क करके सेटिंग्स जमाई जाती हैं। इस कारण रेट बढ़ गए हैं। इन व्यापारियों से जब पूछा गया कि आपके मन मुताबिक रेट देने पर पुलिस और प्रशासन परेशान तो नहीं करेगा, इस पर इनका जवाब था कि इसी का तो बढ़ा हुआ रेट ले रहे हैं। कहीं कोई परेशानी नहीं जाएगी।
जिले के अन्य स्थानों पर भी बोरिंग मशीनें रखी हुई हैं और इनका धड़ल्ले से संचालन हो रहा है। जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण अंचलो मे बोरिंग मशीन के एजेंट सक्रिय रहते हैं। जिनका काम सिर्फ साइड देखना रहता है। बोरिंग एजेंट व बोरिंग मशीनों के संचालक आफिस बनाकर मशीनें गांव-गांव भेज रहे हैं। अवैध कारोबार में बोरिंग व्यापारी आपस में बड़ी ईमानदार भी बरत रहे हैं।
जब सीधी के एक बोरिंग संचालक से मुख्यालय क्षेत्र से ग्रामीण क्षेत्रों में बोरिंग कराने की बात की तो वह बोला कि शहर में ही इतना काम है कि कर नहीं पा रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में कौन जाएगा। वहां कराना है तो बहरी इलाके के बोरिंग एजेंट से संपर्क कर लो।


