शहर में बिक रही निर्धारित रेट से ज्यादा पर शराब, दुकानों में रेट लिस्ट चस्पा करने के अभियान पर भी पहल नहीं

सीधी। जिले कुछ कस्बाई इलाकों सहित सीधी शहर में भी शराब दुकानों में शराब की बिक्री मनमानी दर पर हो रही है। निर्धारित रेट से ज्यादा कीमतों पर शराब की बोतलें थमाने का काम लगातार हो रहा है।
इस पर जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ-साथ आबकारी विभाग भी चुप्पी साधे हुए है। जबकि, नियम है कि विधिवत रेट सूची दुकान के सामने लगाना चाहिए। लेकिन इसका पालन किसी भी शराब दुकानों में होता नहीं दिख रहा है।
हालात ये है कि सीधी शहर के पांच दुकानों में शराब की बिक्री को लेकर तमाम शिकायतें आ रही हैं।
प्रमुख दुकान सोनांचल बस स्टैंड एवं सम्राट चौराहे, पटेल पुल नया बस स्टैंड के करीब अंधियार खोह, पावर हाउस के पीछे सहित अन्य दुकानों में इस तरह विसंगतियां देखनें को मिल रही हैं। जिस शराब की कीमत निर्धारित है उससे ज्यादा रेट पर नियम को दरकिनार कर शराब की बिक्री की जा रही है। जो यह साबित करता है कि इस पूरे मामले में कहीं न कहीं प्रशासन की मिलीभगत भी ठेकेदार के साथ है।
कुछ लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हमने शहर के सम्राट चौराहा एवं बस स्टैंड में शराब खरीदी। जिसके तहत पेटीएम के तहत पेमेंट किया। जिसमें बताया गया कि सामने वालों ने एक किंगफिशर बियर लिया। जिसकी कीमत न्यूनतम 186 रुपए एवं अधिकतम 205 रुपए दर्ज है। जबकि दुकानदार द्वारा 240 रुपए लिया गया। इसी तरह एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि हमने शहर के ही सम्राट चौराहे में ऑफीसर च्वाइस का क्वार्टर लिया। जिसकी न्यूनतम कीमत 136 एवं अधिकतम 150 रुपए प्रिंट रेट है, लेकिन 180 रुपए में दिया गया है।
ये एक दो मामला नहीं है। इस तरह के कई मामले हैं। ठेेकेदार की मनमानी के कारण इस तरह की स्थितियां देखने को मिल रही हैं और कहीं न कहीं लापरवाही खुलकर सामने आई है। फिर भी जिम्मेदार अधिकारी की मुट्ठी गर्म होने से उनकी आंख में पट्टी बंधी है। यही वजह हो सकती है कि कार्रवाई से परहेज कर रहे हैं।
इस मामले में आबकारी विभाग कार्यवाही करने के नाम पर अनजान बने हैं। जिस वजह से दुकानों में अंधेरगर्दी मची है। नियम तो ये है कि शराब की दुकानों में निर्धारित रेट से ज्यादा यदि शराब की बिक्री की जा रही है, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन इस पर जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। मनमानी रेट पर शराब बिक्री के बाद भी कोई पहल नहीं हो रही है।
जिला प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद
इस पूरे मामले को लेकर सरकार को भारी राजस्व देने वाले जिले में शराब प्रेमी ग्राहकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सभी शराब की दुकानों पर रेट लिस्ट के बोर्ड लगाए जाएं और यदि ऐसा यथाशीघ्र नहीं होता तो ये माना जाएगा कि इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की शराब ठेकेदारों से मिली भगत कर उन्हें खुला संरक्षण प्राप्त है।

 

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