सीधी। जिला अस्पताल बचावा, जिउ बचावा संघर्ष मोर्चा” द्वारा आज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुसमी के सामने “अस्पताल बचावा जिउ बचाव सत्याग्रह!” का आयोजन किया गया। सत्याग्रह में क्षेत्रीय ग्रामीण उपस्थिति रहे।
अस्पताल बचावा जिउ बचाव सत्याग्रह!” में आए ग्रामीणों के समक्ष अपनी बात रखते हुए टोंको-रोंको-ठोंको क्रन्तिकारी मोर्चा के संयोजक उमेश तिवारी ने कहा कि जिला अस्पताल की सेवाओं पर निर्भर गरीब, आदिवासी, दलित पिछड़े वर्ग की जनता को मजबूरन निजी स्वास्थ्य संस्थानो से महगी स्वास्थ्य सेवाएँ लेनी पड़ेगी।
अपनी बात रखते हुए लालदेव सिंह ने कहा कि जिला अस्पताल को निजी हाथों में दिया जा रहा है, विडंबना है कि प्रदेश सरकार के इस जन विरोधी निर्णय का विरोध किसी राजनीतिक दल द्वारा नहीं किया जा रहा है। जनता के साथ सरकार द्वारा किए जा रहे विश्वासघात का दोषी शासक दल है ही विपक्ष भी चुप रहकर अपने को अपराधी साबित कर रहा है।
इस दौरान दिनेश सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार निजीकरण का फैसला हम आदिवासियों के लिए बहुत ही दुखद है। निजीकरण होने से आमजन की सुविधा तो प्रभावित होगी निजीकरण के चलते आदिवासी, ओबीसी एवं दलित युवाओं को रोजगार के दरवाजे भी बंद होंगे।
शिवकुमार सिंह ने उपस्थित लोगो से अपने उद्बोधन में कहा कि जिन संस्थाओं का निजीकरण हुआ है वह जनता के लिए जवाब देह नहीं रह जाते हैं उनका काम मुनाफा कमाना ही उद्देश्य है। अस्पताल का निजीकरण करके प्रदेश सरकार गरीबों को स्वास्थ्य सुविधा से वंचित करने की साजिश कर रही है।
अपनी बात रखते हुई श्रीनिवास सिंह नेटी नें कहा कि प्रदेश सरकार हम गरीबों के साथ छल कपट कर रही है जो भी सरकारी संस्थान है उन्हें निजी कर रही है।कर्मचारियों को भी अस्पताल के निजीकरण के विरोध में आना चाहिए, निजी होने के कारण कहां जाएंगे। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी इस मंच से वचन देती है कि निजीकरण के विरोध में हम अंतिम दम तक लड़ाई लड़ेंगे।
सत्याग्रह धरने का संचालन राजकुमार तिवारी द्वारा किया गया।
धरने के बाद मध्य प्रदेश के राजयपाल के नाम का 6 सूत्री ज्ञापन पत्र तहसीलदार को सौंपा गया।
ज्ञापन पत्र में इनकी मांगे रही कि जिला अस्पताल सीधी के निजीकरण पर रोक लगाई जाए।
कुसमी सामुदायिक स्वस्थ केंद्र में रिक्त पदों पर डॉक्टर, महिला डॉक्टर और अन्य स्टाफ की पदस्थापना किया जाए।
कुसमी सामुदायिक स्वस्थ केंद्र अनर्गत आने वाले प्राथमिक स्वाथ्य केंद्र में रिक्त पदों पर डॉक्टर, महिला डॉक्टर और अन्य स्टाफ की पदस्थापना की जाए।

