जबलपुर। पूरे महाकौशल अंचल में बीते 72 घंटों से हो रही वर्षा ने किसानों के चेहरों पर खुशी जा दी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक यह बरसात धान के लिए अमृत की तरह है।
महाकौशल में 95 प्रतिशत से अधिक किसान इस सीजन में धान की फसल ही लेते हैं। इसलिए वर्तमान में हो रही वर्षा कृषि गतिविधियों को गति प्रदान करने वाली ही है।
मौसम विज्ञानियों का कहना है कि इन दिनों महाकौशल के सभी जिलों में जोरदार वर्षा हो रही है। इसके अभी कुछ दिन और जारी रहने की संभावना है।
धान की फसल को लेकर एक पखवाड़े से किसान तेज बारिश का इंतजार कर रहे थे। चार दिन पहले तक मानसून के सक्रिय नहीं होने से किसानों में चिंता घर करने लगी थी। धान की नर्सरी सभी जगह तैयार की जा चुकी थीं। तेज बरसात के बिना रोपा नहीं लगाया जा सकता, इसलिए किसानों को झमाझम बारिश का इंतजार रहा।
वैसे तो महाकौशल के सभी जिलों में पानी गिर रहा है, लेकिन जबलपुर, कटनी, सिवनी, डिंडौरी एवं मंडला में मानसून कुछ ज्यादा ही मेहरबान है।
कृषि विज्ञानी एवं आत्मा परियोजना के डायरेक्टर डॉ. एसके निगम का कहना है कि महाकौशल क्षेत्र में साढ़े चार लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में धान की रोपाई का काम पूर्ण हो चुका है। जहां शेष रह गया है, वो भी एक दो दिन में पूरा हो जाएगा। सब्जियों की खेती में भी अब मेड़ बनाकर फसलें लेने की तकनीक अपनाई जाने लगी है, इसलिए सब्जियों को भी नुकसान की आशंका नहीं है।
वही, जहां मक्का लगाया गया है, वहां जरूर किसानों को पानी निकासी का प्रबंध करना पड़ेगा। आसमान में बादलों के छाए रहने से मक्के की फसल में तना-सड़न रोग का खतरा बढ़ा है। इसी तरह से सोयाबीन में पीला पोजेक का प्रकोप देखा जा रहा है।
कृषि विज्ञानियों के अनुसार खेतों में पानी भराव के कारण मक्के की फसल को आंशिक रूप से हानि की आशंका है।
कृषि विज्ञानियों ने मौसम साफ होने पर मक्का, सोयाबीन व सब्जी की फसल में बढ़त को बरकरार रखने नैनो यूरिया और सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव करने की सलाह दी हैं।


