जहरीली गैस ने छीनी मासूमों की सांसें, एक बच्ची इंदौर रेफर; दो का इलाज जारी

उज्जैन। इंदौर रोड स्थित त्रिवेणी हिल्स मे रूह कंपा देने वाली घटना घटित हुई है। पिता के घर आई दो बेटियों ने हादसे में अपनी मासूम संतानों को खो दिया।
भूखी माता मंदिर मार्ग पर ईंट भट्टा संचालित करने वाले लालचंद प्रजापत के त्रिवेणी हिल्स स्थित मकान में उनकी दो बेटियां अपने बच्चों के साथ छुट्टियां बिताने चार-पांच दिन पहले आई थीं। इनका नाम पूजा (शाजापुर) और रीना (कायथा) है।
पूजा के साथ उसकी पांच साल की बेटी जेनिशा और डेढ़ माह की त्रिशा थी, जबकि रीना के साथ साढ़े तीन माह का बेटा बाबू व चार साल की बेटी अन्नू उर्फ अनिका थी। बीती रात चारों मासूम अपनी माताओं के साथ एक ही कमरे में सोए थे। अगली सुबह नौ बजे करीब उठे तो सभी बच्चों की तबीयत खराब थी। जिसमें पूजा की डेढ़ माह की त्रिशा के मुंह से झाग आ रहा था। इन्हे लेकर परिजन तुरंत निजी अस्पताल पहुंचे। जहां चारों बच्चों को उपचार दिया गया।
वही, शाम चार बजे करीब त्रिशा की मौत हो गई। शाम को ही पोस्टमार्टम के बाद बच्ची का अंतिम संस्कार किया गया। इसी बीच रीना की बेटी अनिका की तबीयत बिगड़ी और उसने भी देर रात को दम तोड़ दिया। सुबह पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि जिस कमरे में बच्चे सोए थे उसी में चार क्विंटल गेहूं अलग-अलग ड्रमों में तीन-चार दिन पहले ही भरकर रखे थे। गेहूं को कीड़ों से बचाने के लिए उनमें कीटनाशक दवा (संभवत: सल्फास या अन्य जहरीली गोलियां) डाली गई थी। जिस कमरे में बच्चे सो रहे थे, वहां वेंटिलेशन (खिडक़ी-रोशनदान) नहीं था। रात भर ड्रमों से निकली जहरीली गैस कमरे में भर गई। बच्चे उसका शिकार हो गए।
नानाखेड़ा थाना प्रभारी नरेंद्र कुमार यादव ने बताया कि घटना की गंभीरता को देखते हुए एफएसएल टीम को मौके पर बुलाकर साक्ष्य जुटाए गए हैं। फिलहाल मर्ग कायम कर जांच की जा रही है।

 

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