मशहूर पार्श्व गायक किशोर कुमार की जयंती पर उनकी समाधी पर जुटे ढेरो प्रशंसक, समाधी पर लगाया दूध-जलेबी का भोग

खंडवा। वर्ष 1979 में रिलीज फिल्म “मंजिल” का दिलकश गीत “रिमझिम गिरे सावन, सुलग-सुलग जाए मन”… रविवार (4 अगस्त) को एक बार फिर जीवंत हो उठा, जब सावन की रिमझिम फुहारों के बीच स्व. किशोर कुमार की समाधी पर उनके प्रशंसक जुटे।
अपने प्रशंसकों को देख किशोर दा ने समाधि में विश्राम करते-करते ही यह गीत गुनगुनाया होगा और यूडलिंग करते हुए सुख और गम के मिलेजुले भाव में डूब गए होंगे।
बता दे कि खंडवा में जन्मे महान पार्श्व गायक स्व. किशोर कुमार की रविवार को जन्मजयंती होने से दूरदराज से सैकड़ों प्रेमी उनकी समाधी पर जुटे। यहां सबने खुशबूदार पुष्प अर्पित किए। इस दौरान रिमझिम बारिश होती रही, तो ऐसा लगा मानो इस मौसम में किशोर दा का मन फिर कहा उठा हो- “भीगें आज इस मौसम में, लगी कैसी ये अगन।”
मशहूर पार्श्व गायक स्व. किशोर कुमार की जन्म जयंती पर खंडवा में उनके चाहने वाले मुंबई, अकोला, गुजरात सहित मध्य प्रदेश के कई शहरों से उनके प्रशंसक पहुंचे। नगर निगम द्वारा समाधि को फूलों से सजाया गया।
किशोर दा कहा करते थे कि दूध, जलेबी खाएंगे और खंडवा में बस जाएंगे, इसलिए उनकी समाधि पर दूध, जलेबी का भोग भी लगाया गया।
समाधि पर स्वरांजलि देने के लिए पार्श्व गायक मिलन सिंह और श्रीजीत भी पहुंचे। दोनों ने मंच से किशोर कुमार के गीतों की प्रस्तुति दी। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी समाधि पर पुष्प अर्पित करके गीत गुनगुनाया।

 

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