खरगोन। मध्यप्रदेश का खरगोन जिला अब देशभर में जल संरक्षण का आदर्श मॉडल बन गया है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने जिले को 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार-2024 में पश्चिम क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ जिले के रूप में चुना है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 18 नवंबर को दिल्ली के विज्ञान भवन में यह सम्मान कलेक्टर भव्या मित्तल को प्रदान करेंगी।
जिले में बीते वर्षों में नर्मदा, नानी, वंशावली और बोराड़ नदियों के पुनर्जीवन सहित 4.21 लाख से अधिक जल संरचनाएं तैयार की गईं, जिनसे 2.31 करोड़ घनमीटर जल भंडारण क्षमता विकसित हुई। कुंदा नदी क्षेत्र से 627 अतिक्रमण हटाकर 106 एकड़ में निधिवन बनाया गया।
जिले में 156 अमृत सरोवर, 45 बावड़ियों का पुनरुद्धार, 48,975 हेक्टेयर में सूक्ष्म सिंचाई और 30 लाख पौधारोपण हुआ।
इन प्रयासों में पूर्व कलेक्टर कर्मवीर शर्मा, सीईओ आकाश सिंह एवं वर्तमान कलेक्टर भव्या मित्तल का अहम योगदान रहा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि खरगोन ने जल संरक्षण के क्षेत्र में जो कार्य किए हैं, वे पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणादायक हैं।
मुख्यमंत्री ने खंडवा जिले की कावेश्वर ग्राम पंचायत को ग्राम पंचायत श्रेणी में राष्ट्रीय जल पुरस्कार में दूसरा स्थान मिलने पर भी बधाई दी।
केंद्रीय भूजल बोर्ड के अनुसार, जिले की सालाना पुनर्भरण क्षमता 1 अरब 5 करोड़ 98 लाख घनमीटर (1059.8 एमसीएम) है। इसमें से कृषि उपयोग 4.14 करोड़ घनमीटर और घरेलू उपयोग 42,935 घनमीटर है। वर्तमान में कुल दोहन क्षमता का लगभग 77.5% हो चुका है। इसी दबाव को संतुलित करने के लिए प्रशासन ने बड़े पैमाने पर स्टॉप डैम, चेक डैम और अमृत सरोवर तैयार किए हैं, ताकि भूजल स्तर स्थिर रह सके और जल स्रोतों में निरंतरता बनी रहे।


