भस्म लिंगार्चन महाअनुष्ठान हुआ संपन्न, भक्तों ने विश्वशांति के लिए किया पूजन

DR. SUMIT SENDRAM

उज्जैन। ज्योतिर्लिंग स्वरूप में विराजमान भगवान श्री महाकाल काल के भी काल हैं। उनके चरणों में लाखों सेवकों द्वारा समर्पित की गई भस्म लिंगार्चन सेवा के कारण आने वाले समय में निश्चित ही विश्वशांति स्थापित होगी और समस्त मानव जाति का कल्याण होगा। यह विचार अखिल भारतीय श्री स्वामी समर्थ सेवामार्ग के पीठाधीश गुरुमाउली ने व्यक्त किए।
यह सुनते ही उपस्थित हजारों सेवकों ने एक स्वर में जय महाकाल का जयघोष किया, जिससे संपूर्ण कार्यक्रम स्थल गूंज उठा।
काल पर अधिराज्य रखने वाले, अकाल मृत्यु एवं भय का निवारण करने वाले, दक्षिणाभिमुख एकमात्र ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर की उज्जैन नगरी, परमपूज्य गुरुमाऊली के आगमन तथा स्वामी सेवकों के अपार उत्साह और सेवाभाव से गूंज उठी।
हिंदू धर्म परंपरा में अवंतिका (उज्जैन) नगरी को मोक्षपुरी, ज्योतिर्लिंग क्षेत्र तथा महाकुंभ पर्वस्थल के रूप में विशेष महत्व प्राप्त है।
यह भस्मलिंगार्चन समारोह सभी के लिए अत्यंत पुण्यदायी है। सामूहिक उपासना के माध्यम से सेवकों को आध्यात्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा तथा जीवन की कठिनाइयों पर विजय पाने की शक्ति प्राप्त होगी ऐसा आशीर्वाद गुरुमाऊली ने दिया।
समस्त सेवक परिवार का विश्वशांति एवं मानव कल्याण हेतु सामूहिक आध्यात्मिक संकल्प स्वामी समर्थ गुरुपीठ के उपव्यवस्थापक, गुरुपुत्र नितीनभाऊ मोरे के मार्गदर्शन में सेवामार्ग की ओर से श्रीक्षेत्र उज्जैन में भस्म लिंगार्चन समारोह अभूतपूर्व प्रतिसाद और अद्वितीय उत्साह के साथ अत्यंत भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ।
इस दौरान विश्वशांति एवं मानव कल्याण के लिए समस्त सेवेकरियों के सामूहिक आध्यात्मिक संकल्प के साथ भस्मलिंगार्चन समारोह का शुभारंभ हुआ।
सेवकरियों ने अत्यंत श्रद्धा-निष्ठा और पूर्ण अनुशासन के साथ यह अतिउच्च सेवा भगवान श्री महाकाल के चरणों में अर्पित की। इसके पश्चात गुरुमाऊली का अमृततुल्य, प्रसादिक हितगुज (उपदेश) हुआ।
इस अवसर पर गुरुमाता मंदाताई मोरे, गुरुपुत्र नितीनभाऊ मोरे सहित अन्य मान्यवर मंच पर उपस्थित रहे।
गुरुमाऊली ने महा ज्योतिर्लिंग स्वरूप में विराजमान प्रभु श्री महाकाल के भस्म लिंगार्चन समारोह का महत्व स्पष्ट किया।
आज की इस अतिउच्च सेवा में सहभागी हुए सभी सेवक भाग्यशाली और पुण्यवान हैं। समस्त मानव जाति के सर्वांगीण कल्याण हेतु, आने वाले संकटों पर विजय पाने के लिए तथा विश्व शांति की स्थापना के उद्देश्य से यह सेवा आयोजित की गई। इसका उद्देश्य राष्ट्र, समाज और धर्महित के साथ-साथ समस्त जीवसृष्टि का कल्याण हो तथा पूरे विश्व में शांति स्थापित हो। साथ ही मानव-निर्मित एवं प्रकृति-निर्मित संकटों से जीवसृष्टि की रक्षा हो और राष्ट्र की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो इसी उदात्त भावना से यह सेवा संपन्न की गई।

 

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