अपनी मांगो को लेकर नवीन व्यावसायिक शिक्षा-प्रशिक्षक महासंघ ने जिला शिक्षा अधिकारी के नाम सौपा ज्ञापन

DR. SUMIT SENDRAM

डिंडोरी। व्यावसायिक प्रशिक्षकों के साथ हो रहे भेदभाव, मानसिक प्रताड़ना और मानदेय में कटौती के विरोध में नवीन व्यावसायिक शिक्षा-प्रशिक्षक महासंघ पदाधिकारी व कार्यकर्त्ताओ के द्वारा जिला मुख्यालय स्थित जिला शिक्षा कार्यालय में पहुंच कर जिला शिक्षा अधिकारी के नाम सहा. परियोजना समन्वयक आशीष पाण्डेय को ज्ञापन सौपा गया।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा का संचालन वर्ष 2014-15 से हो रहा है। जिसमें लगभग 5000 विद्यालयों में 2 व्यावसायिक प्रशिक्षक प्रत्येक विद्यालय में कार्यरत है और उनके द्वारा छात्र-छात्राओं को विद्यालय में ट्रेड से संबंधित (ट्रेनिंग) प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
नवीन व्यावसायिक शिक्षा-प्रशिक्षक महासंघ के द्वारा दिए गए ज्ञापन के मुताबिक व्यावसायिक प्रशिक्षको का मानदेय पहले 22 हजार रूपये था जो अब उसे घटाकर 20 हजार कर दिया गया है, जिससे सभी व्यावसायिक प्रशिक्षकों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। जबकि, इसी कार्य के लिए अतिथि व्याख्याता से हर माह प्रत्येक कक्षा में 2 व्याख्यान कराया जाता है, जिसके लिए उनका मानेदय पहले 500 रूपये प्रति कक्षा प्रति 1 व्याख्यान का निर्धारित था जो, अब उसे बढ़ाकर 1 हजार कर दिया गया है और व्यावसायिक प्रशिक्षकों के मानदेय राशि में कटौती कर दी गई है।
आकस्मिक अवकाश एवं चिकित्सा अवकाश के संबंध में सभी व्यावसायिक प्रशिक्षकों को प्रतिमाह 1 अवकाश का प्रावधान है जिसको अगर व्यवसायिक प्रशिक्षकों के द्वारा उपभोग नहीं किया जाता तो वह अवकाश रद्द कर दिया जाता है।
व्यवसायिक प्रशिक्षकों की मांग है कि उक्त अवकाश प्रति सत्र जुडकर आवश्यकता अनुसार उपयोग करने का प्रावधान किया जाये।
चिकित्सा अवकाश के संबंध व्यवसायिक प्रशिक्षकों को कोई राहत नहीं मिलती है। वे जब कभी भी बीमार पडते है तो व्यवसायिक प्रशिक्षकों को भी अन्य कर्मचारियों की भांति अस्पताल के उपचार की आवश्यकता होती है।
व्यावसायिक प्रशिक्षकों की ई-अटेंडेंस के लिए जो एप बनाया गया है उसका नाम वीटीपी मैनपावर संदर्भित पत्र में दिया गया है। जो मैनपावर का अर्थ मजदूर होता है यह सभी व्यावसायिक प्रशिक्षकों के लिए अपमानजनक है इससे सभी व्यावसायिक प्रशिक्षकों के आत्म सम्मान और स्वाभिमान को ठेस पहुंची है। मैनपावर शब्द अनपढ और अकुशल लोगो के लिए उपयोग किया जाता है। सभी व्यावसायिक प्रशिक्षक स्नातक, स्नातकोत्तर और तकनीकी योग्यताधारी है। इनके लिए उपयोग किया गया मैनपावर शब्द भारत के संविधान के प्रतिकूल है और यह म.प्र. स्कूल शिक्षा विभाग के लिए बेहत दुखद एवं खेद का विषय है। उन्होंने मांग की कि यह पदनाम हटाकर कोई अलग पदनाम किया जाए।
ई-अटेंडेंस की व्यवस्था सर्वप्रथम स्थाई शिक्षकों हेतु विद्यालय में लाया गया था, किंतु उनके अस्वीकार करने पर व्यावसायिक प्रशिक्षकों को अनिवार्य किया जा रहा है। उन्होंने ज्ञापन के माध्यम बताया कि ऑनलॉइन उपस्थिति के मोबाईल एप के माध्यम से उपस्थिति हेतु रजिस्ट्रेशन करने के पश्चात कई व्यावसायिक प्रशिक्षकों को फ्राड कॉल आ रही है जिससे सभी व्यावसायिक प्रशिक्षकों के व्यक्तिगत डेटा के द्वारा अनुचित कार्य एवं नुकसान होने की संभावना के साथ भय की स्थिति व्याप्त है। इस एप में व्यावसायिक प्रशिक्षकों के लिए ओडी का ऑपशन नहीं है। जबकि, प्रतिमाह उचित अतिथि व्याख्याता से स्वीकृत प्राप्त कर उनके कार्यालय जाकर सहमति लेना होता है जो यह कार्य व्यावसायिक प्रशिक्षकों करते है, तत्पश्चात पत्र व्यवहार किया जाता है। जो प्रतिमाह आठ अतिथि व्याख्यान निर्धारित है। साथ ही त्रैमागिक औद्यौगिक भ्रमण के लिए भी संबंधित औद्यौगिक केन्द्र में पूर्व से जाकर अवलोकन किया जाता है और सहमति प्राप्त करनी होती है जिसके लिए ओडी का प्रावधान नहीं है।
वार्षिक परीक्षा परिणाम के संबध में महोदय हर वर्ष विद्यार्थियों के वार्षिक परीक्षा परिणाम का विषयवार आकलन किया जाता है।। जिसमें व्यावसायिक प्रशिक्षकों के ट्रेड (विषय) 95 प्रतिशत परीक्षा परिणाम निर्धारित है, जबकि अन्य। उषय शिक्षकों के लिए 30 प्रतिशत परीक्षा परिणाम निर्धारित है जो पूर्णतः भेद भाव पूर्ण व्यवहार है।
व्यावसायिक प्रशिक्षकों की भूमिका विद्यालय में बहुत महत्वपूर्ण है, क्योकि व्यावसायिक प्रशिक्षकों के द्वारा विद्यालय में प्रधानमंत्री द्वारा स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत अध्ययनरत ट्रेड से संबंधित छात्र-छात्राओं को विभिन्न कौशल प्रदान कर रहे है। और उन्हे बहुमुखी प्रशिक्षण देकर रोजगार और स्वरोजगार के लिए तैयार करते आए है और कर रहे है। जिसका परिणाम भी सामने आ रहा है।
व्यावसायिक प्रशिक्षको ने जिला शिक्षा अधिकारी से अनुरोध किया है कि इन समस्याओं का समाधान करे और व्यावसायिक प्रशिक्षकों को न्याय दिलाये।
ज्ञापन देने के दौरान नवीन व्यावसायिक शिक्षा-प्रशिक्षक महासंघ जिलाध्यक्ष सुमित नागेश, जिला उपाध्यक्ष पूर्णिमा कोल, जिला सचिव लक्ष्मी यादव, जिला सह सचिव ऋचा शुक्ला, जिला कोषाध्यक्ष मुक्ता सोनी सहित अन्य व्यावसायिक प्रशिक्षक मौजूद रहे।

 

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