जबलपुर। “हमारे बच्चे नहीं हैं तो क्या हुआ, मेरे शरीर से बच्चों को ट्रेनिंग मिलना चाहिए। मेरे निधन के बाद मेरे शरीर को मेडिकल कॉलेज जबलपुर को दे देना। यह बात अनिल काले ने अपनी पत्नी नीना काले से कहीं थी।
गुरुवार सुबह अचानक जब ह्रदयाघात के कारण अनिल काले ने इस दुनियां का साथ छोड़ा तो पत्नी ने सभी के सामने जिद पकड़ी कि अंतिम संस्कार नहीं सिर्फ देहदान किया जायेगा।
बता दे कि जबलपुर के शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में पदस्थ लिपिक वृंदावन कॉलोनी, गंगा मैया, इंद्रा नगर, रांझी निवासी 55 वर्षीय अनिल काले का ह्रदयघात हो जाने से निधन हो गया।
उनकी अंतिम इच्छा के अनुरूप मेडिकल छात्रों के परीक्षण और मूल्यांकन के लिए देहदान मेडिकल कॉलेज जबलपुर में गुरुवार सुबह 11 बजे किया गया।
बताया गया कि अनिल काले की दिनचर्या बहुत ही संयमित और संस्कारों से युक्त रही। ब्रम्ह मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत होकर पूजन अर्चन व आरती करते थे, साथ ही रामचरित मानस पाठ प्रतिदिन करते थे।
वही, पूरे कॉलोनी में वे घर-घर जाकर रामायण सुन्दरकाण्ड पाठ करते थे।
सुबह नियमित रूप से कार्यालय पहुंच कर सबको राम राम करते, योग, शाकाहार और संस्कारों के साथ संयमित जीवन जी रहे थे। उनको बच्चों से बड़ा प्रेम था लेकिन खुद के बच्चे नहीं थे।
पति पत्नी सामंजस्य के साथ कॉलोनी, कॉलेज स्टाफ और समाज में सभी से राधे राधे बोलना और सबके हाल चाल जानना उनके दैनिक दिनचर्या थी।
गार्ड ऑफ ऑनर के साथ ही अनिल काले की देह मेडिकल कॉलेज के छात्रों को सौंपी गई।
इस दौरान उनकी पत्नी नीना काले, बड़े भाई श्रीकांत काले, पार्षद प्रतिभा भापकर, पुरुषोत्तम माने, सुनील कुमार, अनिल शिंदे, नितिन माने सहित जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के स्टाफ और संबंधीजन मौजूद रहे।


